Sunday, April 19, 2026
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रेलवे का दोहरा मापदंड: घर से खाना लाने वालों पर जुर्माना, पर IRCTC की ‘लूट’ और ‘खराब खाने’ पर चुप्पी क्यों?

राजेश सिन्हा

रेलवे में सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब घर का बना खाना गले की फांस बनता जा रहा है। एक तरफ रेलवे प्रशासन स्वच्छता के नाम पर उन यात्रियों पर भारी जुर्माना लगा रहा है जो खाना खाने के बाद गंदगी छोड़ देते हैं, वहीं दूसरी तरफ ट्रेनों में IRCTC वेंडरों द्वारा परोसे जा रहे घटिया खाने और सरेआम हो रही ओवरचार्जिंग पर लगाम कसने में विभाग पूरी तरह नाकाम दिख रहा है।

कूड़ा फैलाया तो कटेगी जेब: एक दिन में वसूले लाखों

हाल ही में पूर्व रेलवे द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान ने यात्रियों को चौंका दिया है। रेलवे परिसर और ट्रेनों में गंदगी फैलाने के आरोप में मात्र एक दिन में 1,447 मामले दर्ज किए गए, जिनसे कुल 2,89,400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसमें सियालदह और हावड़ा मंडल सबसे आगे रहे।

हैरानी की बात यह है कि घर से खाना लेकर सफर कर रहे परिवारों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। सीट के पास बचा हुआ खाना या कचरा छोड़ने पर रेलवे का नया दस्ता तुरंत जुर्माना ठोक रहा है। रेलवे का कहना है कि यह कदम जागरूकता बढ़ाने के लिए है, लेकिन यात्री इसे ‘तानाशाही’ करार दे रहे हैं।

IRCTC की मनमानी: 5 रुपये की चाय 10 में, 80 का खाना 120 में

एक ओर जहाँ आम यात्रियों पर सख्ती बरती जा रही है, वहीं ट्रेनों में खान-पान की व्यवस्था संभाल रही IRCTC के वेंडरों की मनमानी चरम पर है।

ओवरचार्जिंग: रेलवे की आधिकारिक रेट लिस्ट के अनुसार 150 ML चाय की कीमत 5 रुपये है, लेकिन वेंडर बेखौफ होकर इसे 10 रुपये में बेच रहे हैं।

अवैध वसूली: 80 रुपये की शाकाहारी थाली के लिए यात्रियों से 120 रुपये वसूले जा रहे हैं। रेल-नीर के बजाय अन्य ब्रांड का पानी ऊंचे दामों पर बेचना अब आम बात हो गई है।

गुणवत्ता पर सवाल: सोशल मीडिया और रेल सेवा पोर्टल पर रोजाना हजारों शिकायतें दर्ज होती हैं कि खाना अधपका, दुर्गंधयुक्त या खराब है।

कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ‘खानापूर्ति’
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जहाँ गंदगी फैलाने वाले यात्रियों से तुरंत जुर्माना वसूल लिया जाता है, वहीं वेंडरों के खिलाफ शिकायतों पर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रहती है। रेल मंत्रालय और ‘X’ (ट्विटर) पर आने वाली शिकायतों पर क्या ठोस कदम उठाए गए, इसका ब्यौरा कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता। यात्रियों का आरोप है कि प्रशासन और वेंडरों के बीच की ‘सेटिंग’ के कारण आम आदमी को लूटा जा रहा है।

यात्री आहत, प्रशासन मौन
रेलवे का यह नया नियम कि घर से खाना लाने वालों पर नजर रखी जाए, कहीं न कहीं IRCTC के वेंडरों को फायदा पहुँचाने वाला कदम नजर आता है। अगर रेलवे स्वच्छता के प्रति गंभीर है, तो उसे वेंडरों द्वारा फैलाई जा रही ‘अनियमितताओं की गंदगी’ को भी साफ करना होगा। क्या रेल प्रशासन कभी इन भ्रष्ट वेंडरों पर भी उसी फुर्ती से जुर्माना लगाएगा, जैसी फुर्ती वह आम यात्रियों की जेब ढीली करने में दिखा रहा है?

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