नीतीश कुमार के राज्यसभा की सदस्यता के आवेदन के एक दिन पहले यानी 4 मार्च को इस मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन की जमानत रद्द होती है और बिहार में भाजपा सरकार बनने के दूसरे दिन (16 अप्रैल)को ही मनीष रंजन को जमानत मिल जाती है । ऐसे में यह आम जन में सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं इस पूरे मामले में पटना नीट छात्रा मामले में और बिहार में हुए सत्ता परिवर्तन में कोई कनेक्शन तो नहीं है?
पटना नीट छात्रा मामला पटना और बिहार ही नहीं पूरे देश में चर्चित रहा है। इस मामले में पीड़िता का परिवार निरंतर अपनी बेटी के साथ हुए दुराचार और हत्या के विरुद्ध अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए सशक्त रूप से लड़ रहा है।
वहीं सरकारी जांच एजेंसी स्थानीय पुलिस पुलिस, CID, SIT, और CBI ने भी शुरुवात से लेकर अंत तक बस मामला कैसे ठंडे बस्ते में चला जाए इसका पूरा प्रयास किया। और उन्हें सफलता भी मिल गई।
मतलब दो दिन पूर्व मामले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा 90 दिन के अंदर पोक्सो कोर्ट में इस मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन के विरुद्ध चार्जशीट नहीं दाखिल नहीं करने के आधार बनाकर कोर्ट ने आरोपी मनीष रंजन को जमानत दे दिया।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि 6 जनवरी को मृतक पीड़िता की शुरुआती जांच स्थानीय पुलिस, सीआईडी, एसआईटी, के बाद यह मामला 10 फरवरी को केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सोपा गया।
ओर यह मामला पोक्सो कोर्ट में चल रहा था जिसमें इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी और जहां यह घटना घटित हुई उस शंभू गर्ल्स हॉस्टल का मालिक मनीष रंजन के जमानत पर सुनवाई हो रही थी। लगभग 15 20 दिन तक चले सुनवाई में अचानक 4 मार्च को पोक्सो कोर्ट में मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज कर दी।
ध्यान रहे की 5 मार्च को राज्यसभा के सदस्यता के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख थी। अचानक ही 4 मार्च की शाम 4:00 बजे बिहार में हलचल शुरू हो गई। और 5 मार्च को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने का इशारा कर राज्यसभा की सदस्यता लेने का आवेदन किया।
महज कुछ घंटे में घटित इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम से सिर्फ बिहारवासी ही नहीं पूरा देश आश्चर्यचकित था। लगभग डेढ़ महीने चले इस ड्रामें का पटाक्षेप दो दिन पूर्व यानी 15 अप्रैल को भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण के साथ हुआ।
और यह संयोग है या फिर कुछ और यानी भाजपा कोटे से सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री पद पर शपथ ग्रहण के अगले दिन 16 अप्रैल को नीट छात्रा मामले में एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिल गई।
ऐसे में पीड़िता पक्ष और उनके वकील के साथ निर्दलीय सांसद पप्पू यादव या पूर्व आईएएस अमिताभ दास द्वारा इस मामले में हाई प्रोफाइल लोगो की संलिप्तता का आरोप लगाने में गंभीरता दिख रही है। और भाजपा नेतृत्व ने इसी का शायद सहारा लेकर महज कुछ घंटों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ना चाहते हुए भी राज्यसभा के सदस्यता का आवेदन करवा दिया होगा। ऐसा संदेह व्यक्त होना स्वाभाविक है।
और इस कहानी में सच्चाई तब दिखने लगती है जब राज्य में 15 अप्रैल को भाजपा का मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह होता हैं और अगले दिन 16 अप्रैल को मनीष रंजन को जमानत मिल जाती हैं।
कारण केंद्र सरकार द्वारा इस गंभीर मामले की निष्पक्ष रूप से जांच करने के लिए विशेष रूप से बिठाई गई जांच एजेंसी सीबीआई लगभग डेढ़ महीने की करवाई और जांच के बावजूद एकमात्र गिरफ्तार आरोपी मनीष रंजन के विरुद्ध चार्जशीट नहीं दाखिल कर सकी। जिस कारण आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिल गई।
मामले की सच्चाई कुछ भी हो लेकिन और आज न कल इस पूरे मामले की सच्चाई खुलकर सामने आएगी। और इस मामले में गीता के परिजन के साथ भूमिहार समाज के लोग बेहद सहजता और गंभीरता से सक्रिय है। न्याय पाने के हर संभव लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तैयारी करके बैठे है।
