नई दिल्ली | 21 अप्रैल, 2026
देश के बच्चों और मातृ पोषण की रीढ़ कही जाने वाली लाखों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने आज केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघ (AITUC) के बैनर तले आज जंतर-मंतर पर आयोजित राष्ट्रीय धरने में कार्यकर्ताओं ने सरकार पर ‘विश्वासघात’ और ‘श्रमिक विरोधी’ होने का गंभीर आरोप लगाया।

‘डिजिटल इंडिया’ के नाम पर शोषण का हथियार
संघ की महासचिव एड. माधुरी क्षीरसागर ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ‘महिला सशक्तिकरण’ के खोखले नारे दे रही है, जबकि हकीकत में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘बंधुआ मजदूर’ बना दिया गया है। उन्होंने विशेष रूप से पोषण ट्रैकर ऐप और फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) की आलोचना करते हुए इसे शोषण का उपकरण बताया।
तकनीकी बाधाएं: कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बिना मोबाइल फोन या 5G डेटा दिए उन पर ऐप थोपा जा रहा है।
राशन से वंचित: सर्वर डाउन होने और ओटीपी की समस्याओं के कारण गरीब बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भोजन से वंचित रहना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
राष्ट्रीय नेता विजयलक्ष्मी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अप्रैल 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पूर्णकालिक कर्मचारी हैं और ग्रेच्युटी की हकदार हैं। इसके बावजूद, सरकार ने न तो इसके लिए बजट आवंटित किया और न ही कोई ठोस नीति बनाई। यह न्यायपालिका और करोड़ों महिलाओं का अपमान है।
निजीकरण की ‘पिछले दरवाजे’ से कोशिश
ज्ञापन में एक चौंकाने वाले यूजीसी (UGC) परिपत्र का खुलासा किया गया है, जिसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों को कॉलेजों की ‘सामाजिक जिम्मेदारी’ के नाम पर आउटसोर्स करने की योजना है। संघ ने इसे आईसीडीएस (ICDS) योजना के निजीकरण की साजिश करार देते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है।
प्रमुख मांगें जिन पर सरकार है मौन:
वेतनमान और पेंशन: 2018 से रुके हुए मानदेय को संशोधित कर सरकारी कर्मचारी के समान वेतन और 10,000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
सामाजिक सुरक्षा: चिकित्सा अवकाश, ईएसआई (ESI) और भविष्य निधि (PF) की सुविधा अनिवार्य हो।
कार्य स्थितियां: चिलचिलाती गर्मी में छुट्टियों का प्रावधान और 65 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु।
इस विरोध प्रदर्शन में महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा, मेघालय, पंजाब और तेलंगाना सहित कई राज्यों की महिला नेताओं ने हिस्सा लिया। भाकपा नेता दिनेश वार्ष्णेय, एटक नेता सुकुमार दामले और किसान सभा के राजन क्षीरसागर जैसे दिग्गजों ने भी आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
संघ की अध्यक्ष उषा साहनी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपनी ‘महिला विरोधी’ हठधर्मिता नहीं छोड़ी, तो यह आंदोलन हर राज्य की राजधानी तक पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया, “हम दान नहीं, अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं।”
