नई दिल्ली: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा के लिए अखिल भारतीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता महासंघ (AITUC) ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। महासंघ के प्रमुख नेता कुमार बिन्देश्वर सिंह द्वारा जारी इस आह्वान के तहत, आगामी 21 अप्रैल 2026 को देश भर की हज़ारों आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने जा रही हैं।
कुमार बिन्देश्वर सिंह ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होने की अपील करते हुए इस ‘राष्ट्रीय स्तरीय धरना आंदोलन’ को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया है।
प्रमुख मांगें जिन पर टिका है आंदोलन
इस प्रदर्शन के माध्यम से नेता कुमार बिन्देश्वर सिंह ने केंद्र सरकार के समक्ष 9 सूत्रीय मांग पत्र रखा है, जिसमें प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- नियमितीकरण और समान वेतन: सभी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवा को नियमित किया जाए और गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप न्यूनतम वेतन सुनिश्चित हो।
- सेवानिवृत्ति और पेंशन: सेवानिवृत्त कार्यकर्ताओं के लिए ₹10,000 की मासिक पेंशन की व्यवस्था हो और पूरे भारत में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।
- न्यायिक आदेशों का पालन: ग्रेच्युटी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश को तत्काल लागू किया जाए।
- तकनीकी और मानसिक सुरक्षा: FRS (फेसियल रिकग्निशन) के जरिए लाभार्थियों और कार्यकर्ताओं को टारगेट करना बंद हो और कार्यस्थल पर होने वाले मानसिक उत्पीड़न पर रोक लगे।
- श्रम कानूनों का विरोध: कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए श्रम कोड (Labour Codes) को वापस लेने की पुरजोर मांग की है।
“वर्कर्स यूनिटी जिंदाबाद” का नारा
कुमार बिन्देश्वर सिंह ने पोस्टर के जरिए संदेश दिया है कि श्रमिकों की एकता ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने “Join Every One, Join All” के नारे के साथ देश के कोने-कोने से आंगनवाड़ी बहनों को दिल्ली पहुंचने का निमंत्रण दिया है।
आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे देश की नींव यानी बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य की देखभाल करती हैं, लेकिन आज वे स्वयं बुनियादी सुविधाओं और सम्मान के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। 21 अप्रैल का यह धरना सरकार की नीतियों के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
