पटना, 14 अप्रैल। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की एनडीए सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अराजकता का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने जारी एक बयान में स्कूलों में संगीत शिक्षकों की कमी और करोड़ों रुपये के वाद्य-यंत्रों की खरीद पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
76 हजार स्कूलों में शिक्षक नहीं, पर खरीदे गए 158 करोड़ के यंत्र
तेजस्वी यादव ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बिहार के 76,000 से अधिक प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में एक भी संगीत शिक्षक नियुक्त नहीं है। इसके बावजूद जदयू-भाजपा सरकार ने हारमोनियम, तबला, सितार और ढोलक जैसे वाद्य-यंत्रों की खरीद पर 158.44 करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं।
तेजस्वी यादव के अनुसार ”जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं, तो ये यंत्र बजाएगा कौन? स्पष्ट है कि ये वाद्य-यंत्र बच्चों के सीखने के लिए नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार रूपी म्यूजियम में सजाने और कमीशन सेट करने के लिए खरीदे गए हैं।”
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि न तो विद्यालयों के शिक्षकों ने इन उपकरणों की मांग की थी और न ही उन्हें इनके उपयोग का कोई प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जहां एक ओर शिक्षक अभ्यर्थी वर्षों से बहाली और वैकेंसी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं सरकार के पास संगीत शिक्षकों की रिक्तियों तक का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है।
तेजस्वी यादव ने सीधे सत्ताधारियों को निशाने पर लेते हुए पूछा कि आखिर बिना बहाली के करोड़ों के यंत्र खरीदने की इतनी हड़बड़ी क्यों थी? उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में अपारदर्शिता बरती गई है ताकि मंत्रियों और अधिकारियों के बीच कमीशन का बंदरबांट हो सके।
उन्होंने सरकार को ‘विश्वासघाती तंत्र और यंत्र की सरकार’ बताते हुए कहा कि बिहार की जनता के पैसों से यह सरकार अपना ‘मेहनतनामा’ वसूल रही है और राज्य को भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा पर ले गई है।
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