Friday, April 17, 2026
Homeराष्ट्रीयSC-ST एक्ट का दुरुपयोग करने वालों पर कसेगा शिकंजा: झूठी गवाही और...

SC-ST एक्ट का दुरुपयोग करने वालों पर कसेगा शिकंजा: झूठी गवाही और फर्जी मुकदमों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति इस कानून का इस्तेमाल निजी रंजिश निकालने या किसी को जानबूझकर फंसाने के लिए करता है, तो उसे गंभीर कानूनी परिणामों का सामना करना होगा।

क्या है नया निर्देश और कानूनी प्रावधान?

​सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर इस दिशा में सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत का मानना है कि निर्दोषों को बचाना उतना ही जरूरी है जितना कि पीड़ितों को न्याय दिलाना।

मुख्य बिंदु और संभावित दंड:

  • झूठी गवाही पर सजा: यदि कोर्ट में यह सिद्ध हो जाता है कि SC-ST एक्ट के तहत लगाया गया आरोप पूरी तरह निराधार और द्वेषपूर्ण था, तो शिकायतकर्ता और झूठी गवाही देने वालों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत 5 से 10 साल तक की कैद का प्रावधान प्रभावी हो सकता है।
  • भारी जुर्माना: अदालत ऐसे मामलों में आरोपी के मान सम्मान को पहुंची ठेस की भरपाई के लिए शिकायतकर्ता पर ₹15 लाख तक का जुर्माना भी लगा सकती है।
  • सरकारों को नोटिस: माननीय न्यायालय ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि जांच एजेंसियां निष्पक्षता से काम करें और एफआईआर दर्ज करने से पहले तथ्यों की प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) अवश्य की जाए।

अदालत की टिप्पणी: ‘पिंजरे का तोता’ नहीं, रक्षक बने तंत्र

​हाल के दिनों में अदालतों ने यह देखा है कि कई मामलों में जांच एजेंसियां रसूखदारों के दबाव में या फिर बिना किसी ठोस सबूत के कार्रवाई करती हैं। जैसा कि पूर्व में ‘पिंजरे का तोता’ (Caged Parrot) वाली टिप्पणी चर्चा में रही है, सुप्रीम कोर्ट अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कानून का उपयोग ‘ढाल’ (Shield) की तरह हो, न कि ‘हथियार’ (Weapon) की तरह।

आज से नियम लागू करने के सख्त आदेश

​सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्याय प्रक्रिया में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। झूठे मुकदमे दर्ज करने वाले सिंडिकेट पर नकेल कसने के लिए यह आदेश आज से ही प्रभावी माना जाएगा, ताकि निर्दोष लोगों को जेल की सलाखों के पीछे न जाना पड़े।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे