राजस्व मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल का कड़ा रुख- रविवार को भी खुलेंगे कार्यालय, लापरवाही पर अधिकारियों की तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
पटना, 10 जून: बिहार सरकार राज्य के लाखों रैयतों (भू-स्वामियों) को भूमि विवादों और दस्तावेजों की विसंगतियों से मुक्ति दिलाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है।
पिछले वर्ष आयोजित ऐतिहासिक ‘राजस्व महा-अभियान’ के दौरान प्राप्त हुए 46 लाख लंबित आवेदनों के त्वरित निष्पादन के लिए 11 जून से 17 जून 2026 तक राज्यभर के सभी अंचलों में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान रविवार को भी छुट्टी नहीं रहेगी और कार्यालयों में काम जारी रहेगा।
बुधवार को पुराना सचिवालय स्थित मुख्य सभागार में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने इस निर्णय की घोषणा की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह भी मौजूद थे।
काम की धीमी रफ्तार पर मंत्री ने जताई गहरी चिंता
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि पिछले वर्ष 16 अगस्त से 20 सितंबर 2025 तक राज्यभर में शिविर लगाकर डिजिटल जमाबंदी में त्रुटि सुधार, छूटी हुई जमाबंदियों को ऑनलाइन करने, उत्तराधिकार आधारित नामांतरण (Inheritance Mutation) और बंटवारा आधारित नामांतरण के कुल 46 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे।
विभाग ने इन्हें निपटाने के लिए 31 मार्च 2026 तक का लक्ष्य रखा था, लेकिन कई जिलों में कार्य की गति बेहद धीमी रही। मंत्री ने अद्यतन रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि:
अब तक प्राप्त आवेदनों में से मात्र 81.91 प्रतिशत की ही स्कैनिंग हो सकी है।
संबंधित ऑनलाइन पोर्टलों पर केवल 26.43 प्रतिशत आवेदन ही अपलोड किए जा सके हैं।
डॉ. जायसवाल ने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताते हुए कहा कि लाखों रैयतों के आवेदनों को इस तरह लंबित रखना कतई स्वीकार्य नहीं है।
तीन चरणों में मिशन मोड पर होगा काम
मंत्री ने स्पष्ट किया कि 11 से 17 जून तक चलने वाले इस विशेष शिविर में मुख्य रूप से तीन चरणों में कार्य को पूरा किया जाएगा:
शत-प्रतिशत स्कैनिंग: महा-अभियान के दौरान मिले सभी आवेदनों की डिजिटल स्कैनिंग पूरी की जाएगी।
शत-प्रतिशत अपलोडिंग: सभी स्कैन किए गए दस्तावेजों को तुरंत संबंधित सरकारी पोर्टलों पर अपलोड किया जाएगा।
त्वरित निष्पादन: इसके बाद तीसरे चरण में सभी आवेदनों का समयबद्ध और त्वरित निपटारा किया जाएगा ताकि जनता को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
विशेष सर्वेक्षण अमीनों को भी मोर्चे पर उतारा गया
इस महा-अभियान को गति देने के लिए विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों में कार्यरत विशेष सर्वेक्षण अमीनों (Special Survey Amins) की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है।
हालांकि, शिवहर, शेखपुरा, लखीसराय, जहानाबाद और अरवल जिलों को इससे मुक्त रखा गया है, क्योंकि इन 5 जिलों में 15 अगस्त तक भूमि सर्वे का कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। शेष सभी जिलों के सर्वे कर्मी स्कैनिंग और अपलोडिंग के कार्य में हाथ बंटाएंगे।
अधिकारियों को अंतिम चेतावनी: ‘यह केवल औपचारिकता नहीं’
डॉ. दिलीप जायसवाल ने अधिकारियों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि इस अभियान को केवल एक औपचारिकता न समझा जाए। निर्धारित समय में लक्ष्य पूरा न होने पर संबंधित अंचल अधिकारी (CO) और राजस्व अधिकारी (RO) की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
विभागीय स्तर पर कार्यों की दैनिक और नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बिहार भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है और इसमें किसी भी स्तर पर पारदर्शिता और तत्परता से समझौता नहीं किया जाएगा।
