पटना: बिहार राज्य आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन (एटक से संबद्ध, निबंधन सं. 3985/05) ने राज्यभर की आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के हक और अधिकारों की लड़ाई को तेज करने के लिए बिगुल फूंक दिया है। यूनियन के महासचिव कुमार विन्देश्वर सिंह ने राज्य के सभी जिला एवं परियोजना कमिटियों के अध्यक्षों, महासचिवों और नेतृत्वकर्ताओं के नाम एक महत्वपूर्ण पत्र जारी कर 19 और 20 सितंबर 2026 को पटना के विद्यापति भवन में दो दिवसीय राज्य सम्मेलन का औपचारिक ऐलान किया है।
सम्मेलन का पूरा शेड्यूल और मुख्य बातें
स्थान: विद्यापति भवन, विद्यापति मार्ग (तारामंडल से उत्तर), पटना।
समय: शनिवार, 19 सितंबर 2026 (सुबह 11:00 बजे से) से रविवार, 20 सितंबर 2026 (संध्या 4:00 बजे तक)।
प्रतिनिधि भागीदारी: प्रत्येक परियोजना से कम से कम 5 प्रतिनिधियों का शामिल होना अनिवार्य है।
चयन का पैमाना: परियोजना स्तर पर प्रति 50 सदस्यों पर 1 प्रतिनिधि का चुनाव किया जाएगा। केवल चयनित प्रतिनिधि ही राज्य सम्मेलन में आधिकारिक तौर पर भाग ले सकेंगे।
सदस्यता शुल्क और राष्ट्रीय सम्मेलनों में भागीदारी की शर्त
यूनियन के महासचिव ने स्पष्ट किया है कि संगठन की मजबूती ही संघर्ष की नींव है। इसके लिए नियम तय किए गए हैं:
30 अगस्त 2026 तक सदस्यता शुल्क अनिवार्य: राज्य सम्मेलन एवं खगड़िया में 2 से 4 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले एटक राज्य सम्मेलन में वही प्रतिनिधि भाग ले सकेंगे, जिनका सदस्यता शुल्क 30 अगस्त तक राज्य नेतृत्व के पास जमा हो जाएगा।
राष्ट्रीय महाधिवेशन (बेंगलुरु): खगड़िया राज्य सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिनिधियों में से ही बेंगलुरु में आयोजित होने वाले एटक के राष्ट्रीय महाधिवेशन के लिए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा।
राष्ट्रीय सम्मेलन (गोवा): ‘ऑल इंडिया आंगनवाड़ी वर्कर्स फेडरेशन’ का राष्ट्रीय सम्मेलन गोवा में आयोजित होने की सूचना है, जिसके लिए भी राज्य स्तर से मजबूती से भागीदारी तय की जाएगी।
”सरकार के हमलों के खिलाफ संघर्ष ही एकमात्र रास्ता”
यूनियन नेतृत्व ने राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि लगातार आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के अधिकारों का हनन किया जा रहा है और उन पर चौतरफा हमले हो रहे हैं।
महासचिव कुमार विन्देश्वर सिंह का आह्वान:
“आंगनबाड़ी बहनें और भाई अब जागें! सरकार की दमनकारी नीतियों के खिलाफ एक बार फिर एकजुट होकर मजबूत संघर्ष की तैयारी में जुटना होगा। हमारे पास हक मांगने का नहीं, बल्कि छीनने का—यानी संघर्ष के सिवा और कोई रास्ता नहीं बचा है।”
यूनियन ने सभी परियोजना एवं जिला कमिटियों के नेताओं से अपील की है कि वे अभी से युद्ध स्तर पर सदस्यता अभियान चलाएं ताकि 19-20 सितंबर का पटना सम्मेलन ऐतिहासिक और सफल बन सके।
