Monday, May 25, 2026
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सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को मातृभाषा का दर्जा मिलना ऐतिहासिक और सराहनीय: संजय सरावगी

पटना। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दिए जाने का चौतरफा स्वागत हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सरावगी ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषाई गौरव और करोड़ों मैथिली भाषियों की भावनाओं का सच्चा सम्मान है।

​उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संबंधित संस्थाओं का आभार जताते हुए कहा कि इस फैसले से मैथिली भाषा को देश की शिक्षा व्यवस्था में एक सशक्त और सम्मानजनक स्थान मिला है।

​शिक्षा व्यवस्था में मैथिली को मिला सम्मानजनक स्थान

​प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय सरावगी ने कहा कि लंबे समय से मैथिली भाषा के संरक्षण, संवर्धन और इसे शिक्षा व्यवस्था की मुख्यधारा में शामिल करने की मांग की जा रही थी। ऐसे में सीबीएसई का यह फैसला पूरे मिथिलांचल और बिहार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा:

​”भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह किसी समाज की संस्कृति, इतिहास, परंपरा और सामूहिक चेतना की वाहक होती है। महाकवि विद्यापति की परंपरा से लेकर मिथिला की लोक विरासत तक, मैथिली ने सदियों से भारतीय सभ्यता और साहित्य को समृद्ध किया है।”

​नई शिक्षा नीति और पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना

​श्री सरावगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में भारतीय भाषाओं, स्थानीय संस्कृतियों और परंपराओं के संरक्षण को हमेशा प्राथमिकता दी गई है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) में भी मातृभाषा आधारित शिक्षा पर विशेष बल दिया गया है और सीबीएसई का यह निर्णय इसी सोच को आगे बढ़ाता है, जहां भारत की भाषाई विविधता को देश की सबसे बड़ी शक्ति माना गया है।

​बच्चों के बौद्धिक विकास और संस्कृति से जुड़ाव में मददगार

​प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब बच्चे अपनी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करते हैं, तो उनका बौद्धिक विकास तेजी से होता है। इससे उनकी समझने की क्षमता और आत्मविश्वास मजबूत होता है। मैथिली को मिली इस मान्यता से आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा, संस्कृति और जड़ों से गहराई से जुड़ सकेंगी।

​अकादमिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में खुलेंगे नए रास्ते

​इस निर्णय के दूरगामी परिणामों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल किए जाने से न केवल इस भाषा का संरक्षण होगा, बल्कि मैथिली साहित्य, शोध (Research), अकादमिक अध्ययन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी एक नई दिशा मिलेगी। इससे मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत होकर उभरेगी।

​संजय सरावगी ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए सभी मैथिली भाषियों और बिहारवासियों को बधाई व शुभकामनाएं दीं। साथ ही उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे अपनी मातृभाषा के संरक्षण और इसके प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाएं, क्योंकि मातृभाषा का सम्मान ही हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सम्मान है।

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