- बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में आयोजित हुआ जयंती एवं सम्मान समारोह
- रवि संगम, विभारानी श्रीवास्तव और डॉ. शशि भूषण सिंह हुए सम्मानित
- लेखिका निशा अमिताभ की अनूदित पुस्तक ‘आर्मेनियाई बाल कथाएँ’ का हुआ लोकार्पण
नेपाल में हिंदी के प्रचार-प्रसार में डॉ. शरण का योगदान अतुलनीय: पूर्व राज्यपाल
पटना। सिक्किम के पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा है कि डॉ. दीनानाथ शरण साहित्य के एकांतिक साधक और मनुष्यता के कवि थे। उन्होंने न केवल देश में बल्कि नेपाल में भी हिंदी के प्रचार-प्रसार में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू में ‘हिंदी-विभाग’ की स्थापना का सारा श्रेय डॉ. शरण को ही जाता है। वे एक विद्वान समालोचक और लोकप्रिय प्राध्यापक थे, जिनकी रचनाओं में सत्य, न्याय, मानवीय करुणा और सामाजिक पीड़ा की सशक्त अभिव्यक्ति मिलती है।
यह बातें उन्होंने शुक्रवार को बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में डॉ. दीनानाथ शरण स्मृति न्यास के सौजन्य से आयोजित जयंती एवं सम्मान-समारोह का उद्घाटन करते हुए कहीं।
साहित्यकारों को मिला सम्मान
समारोह के दौरान पूर्व राज्यपाल ने हिंदी साहित्य और शोध के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्यकारों को सम्मानित किया:
- ‘डॉ. दीनानाथ शरण स्मृति सम्मान’: बहुचर्चित पर्यटक डायरी और शोध पुस्तक ‘रामायण परिपथ बिहार’ के लेखक रवि संगम को इस सम्मान से विभूषित किया गया। उन्हें वंदन-वस्त्र, प्रशस्ति-चिह्न और 11,000 रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई।
- ‘विदुषी शैलजा बाला स्मृति सम्मान’: प्रसिद्ध लेखिका विभारानी श्रीवास्तव को वंदन-वस्त्र, प्रशस्ति-चिह्न और 5,100 रुपये की सम्मान राशि के साथ सम्मानित किया गया।
- ‘सरस्वती श्री सम्मान’: ब्रजेंद्र कुमार श्रीवास्तव स्मृति न्यास के सौजन्य से वरिष्ठ लेखक डॉ. शशिभूषण सिंह को इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे डॉ. शरण: डॉ. अनिल सुलभ
समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि डॉ. शरण को उनके प्रसिद्ध आलोचना-ग्रंथ ‘हिंदी काव्य में छायावाद’ से व्यापक ख्याति मिली। वे ‘नेपाली साहित्य का इतिहास’ लेखन तथा नेपाली कृतियों के हिंदी अनुवाद के लिए भी हमेशा आदर के साथ याद किए जाएंगे। उन्होंने कविता, कहानी, संस्मरण, उपन्यास, ललित निबंध, भेंट-वार्ता और शोध-निबंध जैसी साहित्य की लगभग सभी विधाओं पर अधिकार पूर्वक लिखा।
पुस्तक लोकार्पण: इस अवसर पर डॉ. सुलभ ने लेखिका निशा अमिताभ द्वारा आर्मेनियाई बाल कथाओं के हिंदी अनुवाद “आर्मेनियाई बाल कथाएँ” पुस्तक का भव्य लोकार्पण भी किया।
स्मृतियों को किया गया साझा
सम्मेलन के साहित्य मंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने अतिथियों का स्वागत किया। इस दौरान स्वर्गीय डॉ. शरण के पुत्र और कई देशों में भारतीय दूतावासों में अधिकारी रहे शम्भु अमिताभ, पुत्री वंदना वीथिका, पुत्रवधु निशा अमिताभ सहित डॉ. जंग बहादुर पाण्डेय, प्रेम खन्ना और प्रभात धवन ने भी डॉ. शरण के व्यक्तित्व और कृतित्व पर अपने विचार साझा किए।
भव्य कवि-सम्मेलन से सजी शाम
समारोह के दूसरे सत्र में एक भव्य कवि-सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें देश के प्रतिष्ठित कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से समां बांध दिया। काव्य पाठ करने वालों में प्रमुख रूप से शामिल थे:
- डॉ. रत्नेश्वर सिंह, सुशील साहिल, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, आराधना प्रसाद, डॉ. पूनम आनंद, मधुरेश नारायण, डॉ. नागेश्वर शर्मा, डॉ. मेहता नगेंद्र सिंह, कुमार अनुपम, मोईन गिरिडिहवी, डॉ. समरेंद्र नारायण आर्य, डॉ. प्रतिभा रानी, डॉ. ओम प्रकाश जमुआर, मिथिलेश कुमार सिन्हा, सच्चिदानन्द शर्मा और संजयलाल चौधरी आदि।
इस गरिमामयी अवसर पर कमल नयन श्रीवास्तव, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, नागेंद्र तिवारी, अविनाश नारायण लाल, डॉ. कुंदन लोहानी सहित कई प्रबुद्धजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का मंच संचालन ब्रह्मानन्द पांडेय ने किया और धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह द्वारा किया गया।
