पुस्तक-चौदस मेले में जुटी पाठकों की भीड़, 5-6 सितम्बर को होगी कथा व काव्य-कार्यशाला
पटना: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में चल रहे ‘हिन्दी पखवारा’ के दूसरे दिन बुधवार को भाषा और साहित्य के प्रति बच्चों का उत्साह देखते ही बना। ‘पुस्तक-चौदस-मेला’ के अवसर पर स्कूली बच्चों के लिए ‘श्रुतलेख’ और ‘कथा-लेखन’ प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन किया गया, जिसमें राजधानी के विभिन्न प्रतिष्ठित विद्यालयों के 50 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
छात्रों को मिला ‘सुलेख’ का मार्गदर्शन
प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए साहित्य सम्मेलन के साहित्यमंत्री भगवती प्रसाद द्विवेदी ने विद्यार्थियों को श्रुतलेख और कथा-लेखन के व्यावहारिक महत्त्व से परिचित कराया। उन्होंने बच्चों को ‘सुलेख’ (सुंदर और शुद्ध लेखन) का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि शुद्ध वर्तनी और स्पष्ट लेखन ही किसी भी भाषा पर आपकी पकड़ को दर्शाता है। इस दौरान उन्होंने छात्रों को सम्मेलन द्वारा आगामी 5 और 6 सितम्बर को आयोजित होने वाली ‘कथा-कार्यशाला’ एवं ‘काव्य-कार्यशाला’ में भाग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
विभिन्न स्कूलों की रही सक्रिय भागीदारी
इस आयोजन में लोयला हाई स्कूल, सेंट जॉन्स स्कूल (क़दमकुआं), किलकारी (सैदपुर), प्रभुतारा स्कूल (संकरी गली), सुदर्शन सेंट्रल स्कूल, गार्गी पाठशाला और शिवम् कॉन्वेंट सहित कई प्रमुख विद्यालयों के बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। छोटे बच्चों ने जहाँ श्रुतलेख में अपनी भाषाई शुद्धता दिखाई, वहीं छठी कक्षा से ऊपर के विद्यार्थियों ने कथा-लेखन में अपनी रचनात्मक सोच का परिचय दिया।
पुस्तक मेले में उमड़े पाठक और अभिभावक
प्रतियोगिता के समापन के बाद विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने परिसर में लगे पुस्तक मेले का आनंद लिया। मेले में बाल-साहित्य के स्टॉलों पर विशेष चहल-पहल देखी गई। पाठकों ने अपनी पसंद की विभिन्न विधाओं की पुस्तकों की जमकर खरीदारी की।
कार्यक्रम के दौरान निर्णायक मंडल के सदस्य चित्तरंजन लाल भारती, डॉ. ऋचा वर्मा, विभारानी श्रीवास्तव, डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी के साथ-साथ आयोजन समिति के संयोजक ई. अशोक कुमार, कुमार अनुपम, डॉ. नागेश्वर प्रसाद यादव, कृष्ण रंजन सिंह, इन्दुभूषण सहाय, नम्रता कुमारी, वी. के. मिश्रा एवं कई स्कूलों के शिक्षकगण उपस्थित रहे।
