बिहार सरकार की बुधवार संपन्न बैठक में एक बार फिर जहां मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा का मतभेद सार्वजनिक हुआ। वही मामले में जदयू कोटे से राज्य सरकार में उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव के कटाक्ष ने विवाद में आग में घी का काम किया।
मामला ज्यादा तूल पकड़ता देख इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्ष को शांत किया। जिसमें मुख्यमंत्री अपने दल के मंत्री विजय कुमार सिन्हा को ही हिदायत देते देखे गए।
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मीडिया में चल रही खबरों में मामला बिगड़ने की स्थिति कैबिनेट बैठक के 26वे प्रस्ताव पर बनी। जिसमें कैबिनेट सचिव पद से रिटायर हो रही पूनम सिन्हा को एक साल का एक्सटेन्शन देने का प्रस्ताव था।
जिसपर कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपना विरोध जताया। लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रस्ताव पठन खत्म होने के साथ ही “मंजूर” शब्द कह दिया। जबकि कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसका विरोध किया। इन सबके बीच पूनम सिन्हा को एक साल का एक्सटेन्शन देने का प्रस्ताव मंजूर हो गया।
इसके बाद कैबिनेट बैठक खत्म हो गई। लेकिन विजय कुमार सिन्हा चुप नहीं बैठे। बैठक खत्म होने के बाद भी वे बोलते रहे कि ऐसे कैबिनेट बैठक का क्या मतलब जब मंत्री परिषद के सदस्यों की बात ही नहीं सुनी जाए।
इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए जदयू कोटे से उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने विजय कुमार सिन्हा को सीधे कहा कि आप को ये सब नहीं जच रहा है तो अपने कृषि मंत्री पद से इस्तीफा दें दे।
उनके अनुसार राज्य कैबिनेट में मुख्यमंत्री को सभी निर्णय लेने का एकाधिकार रहता हैं। कबिनेट मंत्री की उपस्थिति सिर्फ प्रोटोकॉल माना जाता है। इसमें उनके किसी सलाह या विरोध का कोई मतलब नहीं।
इस पर उपमुख्यमंत्री और कृषि मंत्री में बहसबाजी होने लगी। इस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हस्तक्षेप किया और उपमुख्यमंत्री का पक्ष लेते हुए और उनकी वरीयता का हवाला देते हुए कृषि मंत्री को शांत रहने की सलाह दी।
