पटना, 31 अगस्त 2026 — बिहार लोक भवन में आयोजित ‘पाटलिपुत्र प्रज्ञा प्रवाह’ व्याख्यान श्रृंखला के पहले व्याख्यान में प्रख्यात राजनयिक और विद्वान टी.सी.ए. राघवन ने दक्षिण एशिया की बदलती परिस्थितियों और ‘मक्का समझौते’ के संदर्भ में भारत की विदेश नीति पर अपने विचार साझा किए।

मुख्य बातें:
- व्यावहारिक रणनीति की आवश्यकता: टी.सी.ए. राघवन ने कहा कि तेजी से बदलते क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए भारत को भावनाओं के बजाय व्यावहारिक और संतुलित सोच के साथ दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए।
- आतंकवाद पर सख्त रुख: उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत को अपना सख्त रुख बनाए रखना होगा, लेकिन साथ ही दीर्घकालिक पड़ोसी संबंधों के लिए संवाद और संपर्क के रास्ते भी ध्यान में रखने होंगे।
- मक्का समझौता और क्षेत्रीय समीकरण: ‘मक्का समझौते’, पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बढ़ते सहयोग पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह नया त्रिकोण मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया में नए अवसर और चुनौतियां दोनों पैदा कर सकता है। इसमें चीन और अमेरिका के साथ संबंधों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
- बदलता युद्ध स्वरूप: उन्होंने कहा कि विदेश नीति को सिर्फ जीत या हार के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। आधुनिक तकनीक के कारण शक्तिशाली और कम शक्तिशाली देशों के बीच का अंतर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है।

बिहार लोक भवन की नई पहल:
कार्यक्रम में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि बिहार प्राचीन काल से ही ज्ञान और चिंतन का प्रमुख केंद्र रहा है। इस परंपरा को मजबूत करने के लिए लोक भवन आगे भी ऐसे व्याख्यान आयोजित करेगा। राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने स्वागत संबोधन दिया और चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. फैजान मुस्तफा ने सत्र का संचालन किया।

