पटना
ऑनलाइन दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के कार्यों में भारी लापरवाही और मनमानी बरतने पर फुलवारीशरीफ के अंचल अधिकारी (CO) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए अंचल अधिकारी से स्पष्टीकरण की मांग की है।
समीक्षा के दौरान फुलवारीशरीफ अंचल में ऑनलाइन म्यूटेशन के 1208 मामले डिफेक्ट चेक में लंबित मिले। इसके अलावा, इन मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए समाहरणालय परिसर में लगाए गए विशेष कैंप से संबंधित पदाधिकारी का गायब रहना और बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के 26 से 29 अगस्त तक कार्यालय से अनुपस्थित रहने का गंभीर मामला भी सामने आया है।
बिना जाँच आवेदनों को लौटाने पर भी सवाल
लापरवाही सिर्फ लंबित मामलों तक सीमित नहीं है। जिलाधिकारी के संज्ञान में यह बात आई है कि कई मामलों में बिना किसी आवश्यक जाँच-पड़ताल और अभिलेखों के समुचित परीक्षण के ही म्यूटेशन आवेदनों को सीधे आवेदकों को रिवर्ट (वापस) कर दिया गया। ऐसे 1036 संदेहास्पद मामलों की भी गहराई से जाँच करने के आदेश दिए गए हैं।
भूमि सुधार उप समाहर्ता को जाँच के निर्देश
जिलाधिकारी ने पटना सदर के भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) को पूरे प्रकरण की विस्तृत जाँच करने का निर्देश दिया है। जाँच के दायरे में उन तमाम कर्मचारियों और अधिकारियों को चिह्नित किया जाएगा जो इस पूरी प्रक्रिया में दोषी पाए जाएंगे। रिपोर्ट आने के बाद इन सभी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की दो टूक: लापरवाही बर्दाश्त नहीं
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भूमि से जुड़े मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी निष्पादन उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। म्यूटेशन जैसे अहम मामलों में आम नागरिकों को बेवजह की भागदौड़ और परेशानी से बचाने के लिए सभी अधिकारियों और कर्मियों को पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ काम करने की हिदायत दी गई है। जिलाधिकारी के इस सख्त रुख से साफ है कि प्रशासनिक कार्यों में ढिलाई बरतने वालों पर अब गाज गिरनी तय है।
