पटना, 14 सितंबर 2026
हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को पटना समाहरणालय सभागार में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने की। इसमें जिले के सभी वरीय पदाधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं है, बल्कि यह भारत के जनमानस, सभ्यता, संस्कृति और संवेदनाओं से गहराई से जुड़ी भाषा है।
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उन्होंने कहा, “हिंदी आम लोगों की अभिव्यक्ति का सहज और सशक्त माध्यम है। इसकी सरलता, सहजता और आत्मीयता ही इसे जन-जन के हृदय से जोड़ती है। हिंदी में उत्कृष्ट और समृद्ध साहित्य का निरंतर सृजन हो रहा है।” उन्होंने नई पीढ़ी से हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़ने की अपील की।

जिलाधिकारी ने कहा कि आज शिक्षा, प्रशासन, तकनीक और संचार सहित हर क्षेत्र में हिंदी का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। यह हमारी सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय चेतना की महत्वपूर्ण संवाहक है।
उप विकास आयुक्त शुभम कुमार ने बदलते समय में हिंदी की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी आम जनता की भावनाओं और विचारों की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है और प्रशासनिक कार्यों में सरल एवं सहज हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया।
अपर समाहर्ता खगेश चंद्र झा ने हिंदी को सहज, सरल एवं जनसुलभ भाषा बताते हुए कहा कि प्रशासन और जनता के बीच संवाद को अधिक प्रभावी बनाने में सरल हिंदी की अहम भूमिका है।
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वहीं अपर समाहर्ता रविंद्र कुमार दिवाकर ने हिंदी के साहित्यिक विकास और स्वतंत्रता आंदोलन में इसके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी ने राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
इस अवसर पर सहायक निदेशक शैलेंद्र कुमार, वरीय उप समाहर्ता श्रीमती अर्शी शाहीन, देवज्योति सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी हिंदी की समृद्ध परंपरा, साहित्यिक विरासत और वर्तमान उपयोगिता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने अपने सरकारी कार्यों और दैनिक प्रशासनिक जीवन में सरल एवं सहज हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग का संकल्प लिया।
