Monday, September 14, 2026
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जीविका दीदी से लखपति दीदी तक, नालंदा की सुनीता देवी की कहानी, राष्ट्रीय मंच पर हुई चर्चा, केंद्रीय मंत्री ने की सराहना

पटना। बुक कीपर से क्लस्टर फैसिलिटेटर और फिर सफल उद्यमी बनने तक का सफर तय करने वाली नालंदा की सुनीता देवी आज पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शनिवार को आयोजित राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग संवाद कार्यक्रम में सुनीता देवी ने केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री के साथ अपनी उद्यमिता की कहानी साझा की।

नालंदा जिले के पूजा जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुनीता देवी वर्तमान में बिहारशरीफ में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र का संचालन कर रही हैं।
जीविका ने दिया हुनर, जन औषधि केंद्र ने दी पहचान
सुनीता ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले समूह में बुक कीपर के रूप में काम शुरू किया। 2018 में उन्हें क्लस्टर फैसिलिटेटर की जिम्मेदारी मिली। इस दौरान उन्होंने सैकड़ों स्वयं सहायता समूहों के साथ काम किया और महिलाओं की आजीविका और संस्थाओं के संचालन को करीब से समझा।

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2023 में जब नालंदा में प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र शुरू करने की पहल हुई, तो उन्होंने सहायक फार्मासिस्ट के पद के लिए आवेदन किया और चयनित हुईं। शुरुआती दौर में दवाओं की जानकारी कम थी, लेकिन केंद्र के मुख्य फार्मासिस्ट के सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे दवाओं और केंद्र संचालन में दक्षता हासिल कर ली।

इसी अनुभव और परिवार के सहयोग से उन्होंने Pharmaceuticals & Medical Devices Bureau of India (PMBI) से अनुमति लेकर अपना खुद का जन औषधि केंद्र खोल लिया।
अब हर महीने 20-25 हजार की शुद्ध आय
सुनीता के अनुसार, केंद्र शुरू होने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। सभी खर्च निकालने के बाद आज वह प्रतिमाह 20,000 से 25,000 रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और एक सफल लखपति दीदी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।

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संवाद के दौरान उन्होंने एक अहम बात भी रखी। उन्होंने कहा कि आज भी कई लोगों में सस्ती जन औषधि दवाओं की गुणवत्ता को लेकर भ्रम है। वह खुद हर ग्राहक को इसकी गुणवत्ता और असर के बारे में समझाती हैं। जब एक व्यक्ति को फायदा होता है, तो वह अपने पड़ोस और रिश्तेदारों को बताता है, इससे धीरे-धीरे लोगों का भरोसा बढ़ा है।

उन्होंने मंत्री के समक्ष व्यवसाय की चुनौतियां भी रखीं – स्टोर से दवाओं की आपूर्ति में देरी और कुछ जरूरी कंपोजिशन की दवाओं की अनुपलब्धता। उन्होंने मांग की कि आपूर्ति नियमित हो और दवाओं की रेंज बढ़ाई जाए ताकि ग्राहकों को बाहर न जाना पड़े।
मंत्री ने दिया हरसंभव सहयोग का भरोसा
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने सुनीता देवी के संघर्ष और जज्बे की सराहना की। उन्होंने कहा कि जीविका से मिले अनुभव और कौशल को उद्यम में बदलना अन्य महिलाओं के लिए मिसाल है और सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग दिया जाएगा।

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गौरतलब है कि बिहार में लखपति दीदी पहल के तहत अब तक 50 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। यह महिला सशक्तीकरण की दिशा में जीविका के प्रयासों की बड़ी सफलता है।

सुनीता देवी की कहानी साबित करती है कि स्वयं सहायता समूह सिर्फ रोजगार का जरिया नहीं, बल्कि महिलाओं को उद्यमी बनाने का सशक्त मंच है।

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