पटना: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान ने बिहार में सत्ताधारी एनडीए की नींव हिला दी है। 2029 तक सभी 21 एनडीए शासित राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की बात सामने आते ही बिहार में सहयोगियों के बीच तलवारें खिंच गई हैं।
बीजेपी अपने कोर एजेंडे पर अड़ी है, तो उसकी सबसे बड़ी सहयोगी जदयू खुलकर बगावत पर उतर आई है। और इसी फूट का फायदा उठाने के लिए राजद ने बीच मझधार में नीतीश कुमार के सामने सत्ता का जाल फेंक दिया है।
बिहार में UCC पर सियासत या सियासी छटपटाहट? अमित शाह के मिशन-2029 पर JDU विधायक श्याम रजक का विरोध
पहले विरोध, फिर यू-टर्न? JDU में भारी कन्फ्यूजन
बिहार में बवाल की शुरुआत जदयू से ही हुई। शाह के बयान के तुरंत बाद जदयू के कद्दावर नेता और विधायक श्याम रजक ने तीखे तेवर दिखाते हुए ऐलान कर दिया कि जदयू कभी भी UCC का समर्थन नहीं करेगी।
लेकिन इस कड़े विरोध के कुछ ही घंटों बाद पार्टी की हवा निकलती दिखी। सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी ने रुख बदलते हुए नरम लहजे में कहा – “पहले प्रावधान देखेंगे, फिर बात करेंगे।”
एक ही पार्टी, एक ही मुद्दे पर दो बयान! साफ है कि जदयू बुरी तरह फंसी है। वो न तो अपने मुस्लिम-अतिपिछड़ा वोट बैंक को नाराज करना चाहती है और न ही बीजेपी से सीधी टक्कर लेकर कुर्सी गंवाना चाहती है। इसी असहजता के बीच केंद्रीय मंत्री ललन सिंह का अचानक नीतीश कुमार से मिलने पहुंचना इस बात का संकेत है कि अंदरखाने बड़ी खलबली मची है।
बीजेपी का फुल सपोर्ट, बाकी सब ‘वेट एंड वॉच’
दूसरी तरफ बीजेपी ने अपना स्टैंड क्लियर कर दिया है – UCC तो लागू होगा। यह देश की एकता के लिए जरूरी है। बीजेपी के इस अडिग रुख के सामने एनडीए के बाकी सहयोगी दल सहमे हुए हैं और चुपचाप तमाशा देख रहे हैं। सबकी नजर इस पर है कि नीतीश कुमार आखिर किस तरफ जाते हैं।
मौका देख RJD ने खेला मास्टरस्ट्रोक
और जब NDA में फूट दिखी, तो विपक्षी राजद ने देर नहीं की। मनेर से राजद के दबंग विधायक भाई वीरेंद्र ने UCC के बहाने सीधे मोदी सरकार पर हमला बोला और इसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का “शिगूफा” बता दिया।
उन्होंने कहा – “बिहार ही नहीं, पूरे देश में महंगाई और बेरोजगारी चरम पर है। NDA सरकार अपराध पर लगाम लगाने में फेल हो चुकी है। जनता के सवालों से बचने के लिए अमित शाह UCC का शिगूफा छोड़ रहे हैं।”
“बेचारा” वाले बयान पर सियासी घमासान – सम्राट चौधरी के तंज पर प्रशांत किशोर का करारा पलटवार
और इसी के साथ उन्होंने नीतीश कुमार को खुला ऑफर देकर बिहार की सियासत में बम फोड़ दिया –
“हम नीतीश कुमार से कहते हैं, आप बीजेपी को छोड़िए, इधर आइए। BJP को लात मारकर आइए, हम लोगों के साथ सरकार बनाइए।”
यह सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि जदयू को दी गई खुली चुनौती है। भाई वीरेंद्र ने साफ कर दिया है कि अगर जदयू वाकई UCC का विरोध करती है तो उसे कथनी-करनी में फर्क नहीं करना चाहिए। NDA को लात मारकर राजद के साथ आकर सरकार बनानी चाहिए।
सार ये है कि अमित शाह के एक बयान ने बिहार में चुनाव से पहले सत्ता का सारा गणित बिगाड़ दिया है। अब लड़ाई सिर्फ UCC पर नहीं, बल्कि इस बात पर है कि नीतीश कुमार अपनी सेक्युलर छवि बचाते हैं या सत्ता के लिए समझौता करते हैं। और राजद, इसी दुविधा के बीच, सत्ता में वापसी का दरवाजा खोलने के लिए तैयार बैठा है।
