चेन्नई से पटना पहुंचीं तमिल-हिंदी द्विभाषी कृतियां; पांच खंडों में ‘तमिल सीखें’ भी शामिल
पटना। बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के समृद्ध पुस्तकालय में अब दक्षिण भारत के महान तमिल साहित्य की सुगंध भी बिखरेगी। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा चेन्नई में स्थापित केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान ने बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन को 23 अत्यंत मूल्यवान तमिल-हिंदी द्विभाषिक पुस्तकें निःशुल्क भेंट की हैं।
इन पुस्तकों में तमिल साहित्य के महान साहित्यकारों के कालजयी महाकाव्यों के हिंदी अनुवाद और हिंदी भाषियों को बेहद सरल तरीके से तमिल सिखाने वाली पुस्तकें शामिल हैं।
रविवार को सम्मेलन भवन में आयोजित कार्यसमिति की बैठक में सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने इन पुस्तकों को आधिकारिक रूप से सम्मेलन पुस्तकालय को सौंप दिया।
‘तमिल करकलाम’ से हिंदी भाषी आसानी से सीख सकेंगे तमिल
पुस्तकों की विशेषता बताते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने कहा कि संस्थान से पांच खंडों में प्राप्त ‘तमिल करकलाम- तमिल सीखें’ श्रृंखला की पुस्तकें हिंदी माध्यम से तमिल सीखने के लिए बेहद सुगम और सरल हैं। उन्होंने भाषा की सहजता को रेखांकित करते हुए बताया:
“तमिल भाषा की वर्णमाला में मात्र 18 व्यंजन-वर्ण होते हैं। संस्कृत के अत्यंत निकट होने के कारण हिंदी भाषी थोड़े से ही प्रयास से इस समृद्ध और प्राचीन भाषा को आसानी से सीख सकते हैं।”
इन महान ग्रंबिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन को मिलीं केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान की 23 मूल्यवान पुस्तकेंथों और विद्वानों का मिला उपहार
यह साहित्यिक आदान-प्रदान केंद्रीय तमिल संस्थान के भाषा-विशेषज्ञ और प्रसिद्ध विद्वान डॉ. एम. गोविन्द राजन की प्रेरणा से संस्थान के निदेशक प्रो. आर. चंद्रशेखरन द्वारा संभव हुआ है। सम्मेलन को प्राप्त प्रमुख ग्रंथों में शामिल हैं:
तोल्काप्पियम
पत्तुप्पाट्टू
कलित्तोगै
संगम साहित्य
तिरुक्कुरल
पतिनेणकीलक्कणक्कु ग्रंथ
मणिमेखलै
शिलप्पतिकारम
इन शास्त्रीय ग्रंथों का तमिल से हिंदी में अनुवाद डॉ. एम. गोविन्दराजन, डॉ. पी. के. बालसुब्रह्मणयन, डॉ. पे. रामसामी और डॉ. एल. वी. के. श्रीधरन जैसे ख्यातिलब्ध विद्वानों ने किया है।
बैठक में धन्यवाद प्रस्ताव पास, जून में होगी स्थायी समिति की बैठक
पुस्तकों के इस अमूल्य उपहार के लिए कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय तमिल संस्थान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए एक धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया गया। इसके साथ ही बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण सांगठनिक निर्णय भी लिए गए:
जून में बैठक: सम्मेलन की स्थायी समिति की आगामी बैठक जून महीने में बुलाने का निर्णय लिया गया।
अध्यक्ष का निर्वाचन: सम्मेलन के अगले कार्यकाल के लिए अध्यक्ष पद के निर्वाचन संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा हुई।
प्रस्तावों को मंजूरी: स्थायी समिति के समक्ष रखे जाने वाले विभिन्न एजेंडों और प्रस्तावों को कार्यसमिति ने अपनी स्वीकृति दे दी।
बैठक में कई गणमान्य रहे उपस्थित
साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष व बिहार सरकार के पूर्व विशेष सचिव डॉ. उपेन्द्रनाथ पाण्डेय की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में डॉ. मधु वर्मा, डॉ. पुष्पा जमुआर, कुमार अनुपम, इं. बांके बिहारी साव, विभारानी श्रीवास्तव, आराधना प्रसाद, डॉ. शालिनी पाण्डेय, कृष्ण रंजन सिंह, प्रवीर कुमार पंकज, डॉ. नागेश्वर प्रसाद यादव, शमा कौसर ‘शमा’, चंदा मिश्र, डॉ. अमरनाथ प्रसाद, श्री सिद्धेश्वर, डॉ. ऋचा वर्मा, जय प्रकाश पुजारी और अभय सिन्हा सहित कई पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित थे।
