पटना, 19 अप्रैल 2026
पिछले चार दशकों से महिला आरक्षण को लेकर चल रही सियासी जंग अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिर जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एनडीए ने विपक्षी दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में एनडीए की महिला नेताओं के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
शुक्रवार को लोकसभा में हुए मतदान के दौरान यह ऐतिहासिक बिल 298 के मुकाबले 230 वोटों के कारण गिर गया। संवैधानिक संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण सत्ता पक्ष इसे पारित कराने में विफल रहा।
वर्तमान में महिला सांसदों की स्थिति:
कुल महिला सांसद: 75
भाजपा: 31, कांग्रेस: 14, टीएमसी: 11, सपा: 05, द्रमुक: 03, जदयू/लोजपा: 02-02, अन्य: 07
इस बारे में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने इस बिल के जरिए न केवल आरक्षण, बल्कि सीटों के विस्तार का भी प्रस्ताव दिया था।
सांसदों की संख्या: बिल पास होने पर लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 या 850 तक हो सकती थी।
महिला प्रतिनिधित्व: 816 सांसदों में से 272 महिलाएं संसद पहुँचतीं।
बिहार विधानसभा: बिहार में महिला विधायकों (MLAs) की संख्या वर्तमान 29 से बढ़कर 122 हो जाती।
”विपक्ष ने अपनी संकीर्ण राजनीति के लिए महिलाओं के सपनों पर पानी फेर दिया है। देश की आधी आबादी इस धोखे का बदला जरूर लेगी।” — सम्राट चौधरी, मुख्यमंत्री (बिहार)
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद जेडीयू विधायक लेसी सिंह ने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए काला दिन था जब कांग्रेस, टीएमसी और सपा जैसे दल बिल गिरने पर खुशियां मना रहे थे।
वहीं, भाजपा विधान पार्षद अनामिका पटेल ने परिवारवाद पर निशाना साधते हुए कहा, “प्रियंका गांधी और डिंपल यादव तो चुनाव जीतकर सदन पहुँच सकती हैं, लेकिन ये दल नहीं चाहते कि आम घरों की महिलाएं विधायक या सांसद बनें।”
इस मौके पर ‘हम’ पार्टी की विधायक ज्योति मांझी और भाजपा विधायक संगीता कुमारी ने भी विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए और इसे महिला विरोधी मानसिकता करार दिया। भाजपा अब इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी राजनीतिक अभियान छेड़ने की तैयारी में है।
