पटना | 14 मार्च, 2026
पटनावासियों के लिए इस बार मानसून की बारिश जलजमाव की चिंता नहीं, बल्कि राहत लेकर आएगी। पटना नगर निगम ने आगामी मानसून के दौरान शहर को ‘वाटर लॉगिंग’ से मुक्त रखने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। नगर आयुक्त के निर्देश पर शहर के सभी अंचलों में नाला उड़ाही और सिल्ट सफाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि बारिश शुरू होने से पहले जल निकासी का तंत्र पूरी तरह दुरुस्त हो जाए।
युद्धस्तर पर तैयारी: डे-नाइट शिफ्ट में सफाई
नगर निगम ने इस बार समय से काफी पहले अपनी रणनीति लागू कर दी है। 15 फरवरी से शुरू हुआ दूसरे चरण का सफाई अभियान अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। शहर के बड़े ड्रेनेज नेटवर्क से लेकर गलियों के छोटे नालों तक, सफाई का काम डे और नाइट शिफ्ट में किया जा रहा है। अपर नगर आयुक्त ने शनिवार को खुद विभिन्न अंचलों का निरीक्षण कर कार्य की प्रगति देखी और अधिकारियों को 30 अप्रैल तक सभी काम पूर्ण करने का कड़ा निर्देश दिया।
जनता की संतुष्टि ही असली रिपोर्ट
इस बार की तैयारी की सबसे खास बात इसकी पारदर्शिता है। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि जब तक स्थानीय नागरिक काम से संतुष्ट होकर रिपोर्ट पर अपना हस्ताक्षर और मोबाइल नंबर नहीं देंगे, तब तक काम को पूरा नहीं माना जाएगा। निगम मुख्यालय इन नंबरों पर कॉल करके फीडबैक का सत्यापन भी करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि नालों की सफाई केवल कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर हुई है।
राहत के आंकड़े: मुख्य नालों का काम अंतिम चरण में
निगम द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहर के लाइफलाइन माने जाने वाले नालों की स्थिति काफी संतोषजनक है:
- मोहनपुर नाला: 99% कार्य पूरा हो चुका है।
- आनंदपुरी और नेहरू नगर नाला: 82% से अधिक सफाई पूरी हो चुकी है।
- सरपेंटाइन और योगीपुर नाला: यहाँ दूसरे दौर की सफाई चल रही है ताकि जल प्रवाह में कोई बाधा न रहे।
- सैदपुर नाला (अजीमाबाद): यहाँ भी 62% काम हो चुका है और तेजी से आगे बढ़ रहा है।
बीमारियों पर भी प्रहार
जल निकासी के साथ-साथ शहरवासियों के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जा रहा है। सिल्ट (कीचड़) हटाते ही संबंधित जगहों पर चूना, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी-लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि मानसून के दौरान डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा न रहे। इसके अलावा, सड़कों पर खुले मैनहोल और कैचपिट को ढकने का काम भी तेजी से किया जा रहा है।
नगर निगम की इस सक्रियता से उम्मीद है कि इस साल भारी बारिश के बावजूद पटना की सड़कों पर नाव चलने जैसी स्थिति पैदा नहीं होगी और लोगों को जलजमाव से बड़ी राहत मिलेगी।
