Tuesday, April 28, 2026
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बिहार में ‘प्रशासनिक सर्जरी’ या भ्रष्टाचार से समझौता? IAS सीके अनिल की विदाई

पटना: बिहार की नई सरकार के गठन के साथ ही राज्य की प्रशासनिक और राजनैतिक फिजां बदलने लगी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक तरफ बड़े पैमाने पर आईएएस (IAS) अधिकारियों का तबादला कर अपनी नई टीम तैयार की है, वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग के कड़क मिजाज सचिव सीके अनिल को हटाए जाने के फैसले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

​ताजा प्रशासनिक फेरबदल में 1991 बैच के आईएएस अधिकारी सीके अनिल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से हटाकर राज्य योजना परिषद में परामर्शी के पद पर भेज दिया गया है।

चर्चा का केंद्र: * ज्ञात हो कि पूर्ववर्ती सरकार में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व विभाग में व्याप्त गहरे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ा था।

सीके अनिल इस अभियान के मुख्य रणनीतिकार माने जाते थे।

अब उनकी विदाई को आम लोग और राजनीतिक विश्लेषक ‘भ्रष्टाचार के पोषक’ निर्णयों के रूप में देख रहे हैं। चर्चा है कि क्या नई सरकार विजय कुमार सिन्हा के पुराने फैसलों को पलटकर कोई नया संदेश देना चाहती है?

सीके अनिल की जगह अब 2007 बैच के आईएएस जय सिंह को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पूरा प्रभार सौंपा गया है। जय सिंह पहले से ही वित्त विभाग में सचिव का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। इसके अलावा:

डॉ. चंद्रशेखर सिंह: सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के नए सचिव नियुक्त किए गए हैं। उनके पास मुख्यमंत्री सचिवालय और आपदा प्रबंधन विभाग की भी जिम्मेदारी बनी रहेगी।

रॉबर्ट एल चोंग्थू: राज्यपाल के प्रधान सचिव से अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव बनाए गए हैं।

गोपाल मीणा: अब राज्यपाल के नए सचिव होंगे।

शैलेंद्र कुमार: लखीसराय के नए जिलाधिकारी (DM) नियुक्त किए गए हैं।

​प्रशासनिक फेरबदल के साथ ही बिहार कैडर के तीन तेज-तर्रार अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए रिलीव कर दिया गया है:

अनुपम कुमार: पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले अनुपम कुमार अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव होंगे।

बंदना प्रेयषी: अपनी कार्यकुशलता के लिए चर्चित बंदना प्रेयषी को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में संयुक्त सचिव बनाया गया है।

प्रतिमा सतीश कुमार: इन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

एक तरफ जहाँ फाइलों में तबादले हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। हत्या, लूट और दुस्साहसी वारदातों ने आम जनता के बीच ‘आतंक’ का माहौल पैदा कर दिया है।

​भाजपा नेतृत्व वाली इस नई सरकार से लोगों को जिस ‘बेहतर शासन’ और ‘भ्रष्टाचार मुक्त बिहार’ की उम्मीद थी, वह फिलहाल प्रशासनिक खींचतान और बढ़ते अपराधों की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। क्या यह फेरबदल राज्य में व्यवस्था सुधारेगा या फिर यह केवल सियासी प्रतिद्वंद्विता का परिणाम है? यह आने वाला समय ही बताएगा।

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