रातभर गुहार लगाते रहे NDA विधायक, NMCH – PMCH चक्कर लगाते रहे, अंत में मरीज की मौत
पटना: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की संवेदनशीलता पर एक बार फिर से गंभीर और असहज करने वाले सवाल खड़े हो गए हैं। मामला बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र का है, जहां इलाज के अभाव में 13 वर्ष की मासूम बच्ची सोनम कुमारी की दर्दनाक मौत हो गई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस मामले में खुद सत्ताधारी एनडीए (NDA) गठबंधन के घटक दल लोजपा (रामविलास) के विधायक अरुण कुमार खुद रातभर अस्पताल और अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन एनएमसीएच (NMCH) और पीएमसीएच (PMCH) जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में बच्ची को भर्ती नहीं किया गया। अंततः परिजनों को बच्ची को निजी अस्पताल ले जाना पड़ा, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
NMCH से PMCH तक भटकते रहे परिजन, विधायक की भी नहीं हुई सुनवाई
शुरुआत और NMCH का रवैया: बख्तियारपुर विधानसभा क्षेत्र के सालिमपुर निवासी राजेश पासवान की 13 वर्षीय पुत्री सोनम कुमारी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तुरंत नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) ले गए, लेकिन तमाम मिन्नतों के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने भर्ती करने से साफ मना कर दिया।
विधायक की कोशिशें नाकाम: जब स्थानीय लोजपा (आर) विधायक अरुण कुमार को इसकी सूचना मिली, तो उन्होंने खुद डॉक्टरों और अधिकारियों से बात की, लेकिन किसी डॉक्टर ने जनप्रतिनिधि की भी बात नहीं सुनी।
रातभर PMCH का चक्कर: हार न मानते हुए करीब 12:00 बजे बच्ची को पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) ले जाया गया। विधायक और परिजन भोर के 3:00 बजे तक अस्पताल में भर्ती कराने के लिए संघर्ष करते रहे, लेकिन वहां भी किसी ने मरीज को एडमिट नहीं किया।
मंत्री कार्यालय से भी नहीं मिली मदद: सुबह विधायक ने स्वास्थ्य मंत्री कार्यालय में भी संपर्क साधा, लेकिन वहां से भी कोई प्रशासनिक सहयोग या मदद नहीं मिल सकी।
निजी अस्पताल में मौत: कोई रास्ता न बचता देख परिजन थक-हारकर बच्ची को एक निजी अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
“क्या मैं लोजपा (R) का विधायक हूं, इसलिए ऐसा हुआ?” — विधायक का छलका दर्द
सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर विधायक अरुण कुमार ने अपनी ही सरकार की प्रशासनिक लाचारी और अस्पतालों के रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा:
“मैं सरकार का विरोध नहीं कर रहा हूं, लेकिन सरकारी डॉक्टरों या पदाधिकारियों के कारण सरकार बदनाम होती है। मैं पूछना चाहता हूं इस मौत का जिम्मेवार कौन है? हम लोग सिर्फ जनता से वोट मांगते हैं, लेकिन उसके दुख में किसी तरह काम नहीं आते। क्या यह सिस्टम सही है कि एक विधायक की कोई पदाधिकारी बात न सुनता हो या मैं लोजपा (R) का विधायक हूं यही कारण है?”
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मुख्यमंत्री और चिराग पासवान से शिकायत करेंगे विधायक
विधायक अरुण कुमार ने स्पष्ट किया है कि जनता के हक और इस अनदेखी के खिलाफ वे खामोश नहीं रहेंगे:
वे जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री से मिलकर इस पूरी व्यवस्था और घटना की जानकारी देंगे।
अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान को भी इस गंभीर विषय से अवगत कराएंगे।
उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषी अधिकारियों व डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
बड़ा सवाल: जब विधायक लाचार, तो आम जनता का क्या?
यह दर्दनाक घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि अगर राज्य में एक सत्तारूढ़ दल का विधायक रातभर अस्पतालों के चक्कर काटता रह जाए और एक बच्ची को बेड न दिला पाए, तो आम और गरीब जनता को रोजाना किस तरह की बेबसी का सामना करना पड़ता होगा।
