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Friday, October 2, 2026
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MLC चुनाव में ‘एकला चलो’ की राह पर कांग्रेस, महागठबंधन में दरार या रणनीतिक दांव?

बिहार विधान परिषद (MLC) के आगामी द्विवार्षिक चुनाव 2026 को लेकर महागठबंधन के भीतर राजनीतिक खींचतान और विरोधाभास सतह पर आ गए हैं। तमाम अटकलों को विराम देते हुए कांग्रेस ने 'एकला चलो' की राह पकड़ ली है और स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने 5 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।

MLC चुनाव में ‘एकला चलो’ की राह पर कांग्रेस, महागठबंधन में दरार या रणनीतिक दांव?

पटना: बिहार विधान परिषद (MLC) के आगामी द्विवार्षिक चुनाव 2026 को लेकर महागठबंधन के भीतर राजनीतिक खींचतान और विरोधाभास सतह पर आ गए हैं। तमाम अटकलों को विराम देते हुए कांग्रेस ने ‘एकला चलो’ की राह पकड़ ली है और स्नातक तथा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने 5 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है।

खास बात यह है कि जिन सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारे हैं, उनमें से कई सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पहले ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुका है। ऐसे में बिहार की सियासत में यह सवाल जोर-शोर से उठने लगा है कि क्या MLC चुनाव में विपक्षी गठबंधन की गांठें ढीली पड़ चुकी हैं?

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1. कांग्रेस का उम्मीदवार चयन: अनुभव और नए चेहरों का संतुलन

ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी निर्देश के अनुसार पार्टी ने 5 सीटों पर प्रत्याशियों का ऐलान किया है:

दरभंगा शिक्षक: वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा को फिर से मैदान में उतारा गया है।

पटना स्नातक: असदुल्लाह खान पर दांव खेला गया है।

पटना शिक्षक: संजय यादव को प्रत्याशी बनाया गया है।

कोसी स्नातक: मनोज कुमार जायसवाल को उम्मीदवार घोषित किया गया है।

दरभंगा स्नातक: रजनीकांत पाठक मैदान में होंगे।

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इसके अलावा, तिरहुत शिक्षक सीट भाकपा (CPI) के सिटिंग एमएलसी संजय कुमार सिंह के लिए छोड़ी गई है। वहीं तिरहुत स्नातक और सारण शिक्षक सीट पर कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि इन्हें राजद के लिए छोड़ा गया है।

2. राजद की पहले से जारी सूची: सीधी टक्कर की स्थिति

इससे पहले राजद ने 6 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी:

पटना शिक्षक: डॉ. संजीव कुमार सिंह

पटना स्नातक: दिलीप कुमार

कोसी स्नातक: नितेश कुमार

दरभंगा स्नातक: अनिल कुमार झा

सारण शिक्षक: प्रो. जयराम यादव

तिरहुत स्नातक: डॉ. रश्मि विनायक गौतम

टकराव वाली सीटें: पटना शिक्षक, पटना स्नातक, कोसी स्नातक और दरभंगा स्नातक—इन चार प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार सीधे तौर पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं।

3. कांग्रेस का बचाव: “बिना सिंबल का चुनाव, एकजुटता बरकरार”

महागठबंधन में दरार की खबरों के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा:

“यह बिना सिंबल (दलपति चिह्न) वाला चुनाव होता है। पिछली बार भी सभी पार्टियों ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे। इंडिया गठबंधन पूरी तरह एकजुट है। पिछली बार भी दरभंगा, मोतिहारी, कटिहार और बेगूसराय जैसी जगहों पर हम अलग-अलग लड़े थे।”

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स्थानिक स्तर पर वर्चस्व की होड़: यद्यपि कांग्रेस इसे “बिना सिंबल का चुनाव” बताकर फ्रेंडली फाइट का रंग देने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच टकराव से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती: राजद द्वारा एकतरफा घोषणा के बाद कांग्रेस पर अपना राजनीतिक जनाधार और वजूद बचाए रखने का दबाव था। 5 सीटों पर प्रत्याशी उतारना कांग्रेस के आत्म-सम्मान और कैडर को एकजुट रखने की रणनीति का हिस्सा दिखता है।

एनडीए को बढ़त की आशंका: स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान व्यक्ति-विशेष और सीमित मतदाता वर्ग (शिक्षकों एवं स्नातकों) पर निर्भर करता है। ऐसे में एक ही गठबंधन से दो-दो उम्मीदवारों के उतरने से मतों के विभाजन (Vote Split) का सीधा फायदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रत्याशियों को मिल सकता है।

बिहार विधान परिषद का यह चुनाव यह स्पष्ट करता है कि राज्य की राजनीति में गठबंधन राष्ट्रीय और विधानसभा स्तर पर भले मजबूत दिखे, लेकिन स्थानीय निकाय एवं विशेष निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव में दल अपने-अपने आधार क्षेत्र को फैलाने की पूरी कोशिश करते हैं।

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