अनंत सिंह – नीरज कुमार विवाद, JDU में अंदरूनी कलह, NDA की साख पर संकट
राजेश सिन्हा
पटना स्नातक विधान परिषद सीट को लेकर सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर मचा अंदरूनी घमासान अब पूरी तरह सरेआम हो चुका है। जनसुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन जुलूस में JDU के मोकामा से विधायक अनंत सिंह अपने पूरे दलबल के साथ शामिल हुए। और अनंत सिंह ने साफ लहजे में दोहराया कि अनुज सिंह को चुनाव मैदान में उन्होंने ही उतारा है।
विधान परिषद चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही अनंत सिंह ने अपनी ही पार्टी के अधिकृत व संभावित प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और जनसुराज प्रत्याशी को खुलकर समर्थन देने का ऐलान किया था।
इस पर नीरज कुमार की तीखी प्रतिक्रियाएं भी लगातार मीडिया में आती रहीं, लेकिन यह विवाद थमने के बजाय नामांकन के दिन तक गहरा गया। विवाद को सुलझाने के लिए पार्टी स्तर पर निशांत कुमार ने मध्यस्थता की कोशिश भी की, मगर बात नहीं बन सकी।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय ने कहा है कि पटना स्नातक सीट पर जनता दल यूनाइटेड के नेताओं में मचे घमासान से यह साफ दिखता है कि पार्टी के मुखिया नीतीश कुमार का प्रभाव कम हो गया है।
और यह राज्य में जदयू के साथ एनडीए गठबंधन के लिए भी खतरे की घंटी है। अगर ऐसे असंतोष को समय रहते शांत नहीं किया गया तो जदयू के अस्तित्व पर खतरा माना जा सकता है।
वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय बिहार के राजनीति पर निरंतर सटीक टिप्पणी करने के लिए जाने जाते है। उनके अनुसार जदयू में निसंदेह निशांत कुमार की सक्रियता बढ़ना अच्छे संकेत है। लेकिन उनकी मध्यस्थता के बावजूद ये मामला शांत नहीं हुआ है।
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ऐसे में पार्टी नेताओं का अंदरूनी कलह अब आम लोगों के बीच में दिखने लगा है। और पार्टी के अंदर ही नेता आपस में शह और मात का खेल खेलने लगे हैं। इसका गलत संदेश आम लोगों में जा रहा है।
वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडेय ने इस मामले में पार्टी के वरिष्ठ नेता ललन सिंह की चुप्पी पर भी आश्चर्य व्यक्त किया है। उनके अनुसार इस मामले में केंद्र में मंत्री और जदयू सांसद ललन सिंह का नाम शुरुवात से जोर-जोर से उछाला गया है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से इस मामले में उन्होंने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।
उनके अनुसार इस मामले में ललन सिंह के साथ जदयू के वरिष्ठ नेताओं को मध्यस्थता करके मामला शांत करवाने की आवश्यकता है। क्योंकि इस माहौल में चुनाव परिणाम कुछ भी हो लेकिन पार्टी कैडर में एक गलत मैसेज जायेगा।
पार्टी की बैठक और प्रत्याशियों की गतिविधियां
इस गंभीर मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर JDU के शीर्ष नेताओं की एक अहम बैठक हुई। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और राज्य के उपमुख्यमंत्री विजेंद्र यादव मौजूद रहे। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में स्थिति को संभालने के लिए कोई ठोस या गंभीर निर्णय नहीं लिया जा सका।
NDA की साख पर दांव
NDA गठबंधन के अधिकृत प्रत्याशी—नीरज कुमार (पटना स्नातक सीट, JDU) और नवल किशोर यादव (शिक्षक सीट, BJP)—5 सितंबर को अपना नामांकन दाखिल करने की तैयारी में हैं।
हाल ही में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद NDA की साख पहले से ही दांव पर है। ऐसे में JDU के भीतर का यह खुला विद्रोह और शह-मात का खेल विधान परिषद चुनाव के मतदान से लेकर मतगणना के नतीजों तक को बेहद दिलचस्प और संवेदनशील बन चुका है।
