G-HMMWBCZ928
Wednesday, October 21, 2026
Homeराजनीतिनीरज से सबको लड़ना है, नीरज को सबको हराना है'... पर क्या...

नीरज से सबको लड़ना है, नीरज को सबको हराना है’… पर क्या इतना आसान है पटना स्नातक जीतना?

नीरज से सबको लड़ना है, नीरज को सबको हराना है। मेरे एक प्रोफेसर जो कुर्मी जाति से हैं, उन्होंने दो दिन पहले ये बातें कहीं। वे कहते हैं कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव सोशल मीडिया पर जितना रोचक है जमीनी स्तर पर बेहद भिन्न कहा जा सकता है।

नीरज से सबको लड़ना है, नीरज को सबको हराना है’… पर क्या इतना आसान है पटना स्नातक जीतना?

बिष्णु नारायण चौबे 

नीरज से सबको लड़ना है, नीरज को सबको हराना है। मेरे एक प्रोफेसर जो कुर्मी जाति से हैं, उन्होंने दो दिन पहले ये बातें कहीं। वे कहते हैं कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव सोशल मीडिया पर जितना रोचक है जमीनी स्तर पर बेहद भिन्न कहा जा सकता है।

अपने 6 चुनावों के अनुभव को बताते हुए कहते हैं कि शायद यह पहला मौका है जब MLC चुनाव में इस तरह जाति के आधार पर वोटर्स को गोलवंद् किया जा रहा है। लेकिन असली लड़ाई तो एक साल पहले ही थी जब वोटर बनाना था। और, उस लड़ाई में नीरज साल भर पहले खेल कर चुके हैं। मात्र 90 हजार के करीब वोटर हो जाना वही मैनेजमेंट है।

सरकार भले ही NDA की हो, लोकसभा चुनाव के पहले उन्हीं के हलक से निकालेंगे शिक्षकों का हक – PK

भूमिहार जाति से आने वाले मेरे एक पत्रकार मित्र कहते हैं अनंत सिंह की एंट्री से लड़ाई खूब रोचक दिखती है पर अनंत की लोकप्रियता में अनुज की अपनी पहचान का संकट आज तक है। सब जानते हैं पीके का प्रत्याशी जन सुराज के भरोसे नहीं अनंत के नाम पर टिका है। ऐसे में अनुज की पहचान सर्व समाज के नेता की कम और सिर्फ भूमिहार नेता की ज्यादा हो गई है इससे इनकार नहीं कर सकते। स्वभाविक है एक जाति में सिमट चुका चेहरा सबसे मजबूत होगा नहीं।

ऐसे में मोकामा वाले भूमिहार नीरज कुमार से सारा भूमिहार नाराज है यह कहना बेवकूफी है। नीरज की ताकत उनका मोकामा का होना भी है। यह अब तक मोकामा में नीरज के लिए दिख रही गोलबंदी से दिख भी रही है। नवादा, नालंदा और पटना तीनों जिलों में भूमिहार की अगर आधी गोलबंदी भी नीरज के पक्ष में है तो विरोधी अपनी ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं।

अनंत सिंह को उन्हीं की भाषा में जवाब देकर नीरज ने अपनी ताकत का अहसास भी करा दिया है। अनंत भूमिहार के एक वर्ग लोकप्रिय हैं तो नीरज भी दूसरे वर्ग में। तभी तो पटना कॉलेज के मेरे एक प्रोफेसर मित्र कहते हैं भूमिहार के कई प्रसिद्ध लोगों द्वारा यह सवाल उठाना कि स्वामी सहजानंद, श्री कृष्ण बाबू, गणेश शंकर विद्यार्थी, बाबू लंगट सिंह, मुखिया जी जैसे मनीषियों वाला भूमिहार क्यों नीरज का गला घोंटेगा।

राजद वाले दिलीप पटेल इस चुनाव में ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके लिए उनकी ही पार्टी के नेता उदासीन दिखते हैं। तेजस्वी यादव ने पूरे चुनाव प्रचार में ऐसा कोई संदेश या प्रचार नहीं किया है जो दिलीप के लिए उत्साह जगाए। दिलीप पटेल का कुर्मी होना और राजद से चुनाव लड़ना उनके लिए द्वंद्व की स्थिति पैदा कर चुका है। दिलीप ने शुरू से खुद को कुर्मी का अगला नीतीश कुमार बनने का संदेश देकर चुनाव की शुरुआत की।

राष्ट्रवादी सनातनी संगठन ‘संकल्प बिहार’ का गठन, भ्रष्टाचार और सनातन विरोधियों के खिलाफ बुलंद करेंगे आवाज

यानी सीधी चुनौती निशांत को दी। निशांत के नेतृत्व में हो रहे इस पहले चुनाव में दिलीप को सबक सिखाने के लिए निशांत लगातार जमीन पर पांव गड़ाये हैं। नालंदा जिले में श्रवण कुमार, कौशलेंद्र, रुहेल रंजन जैसे एक दर्जन निशांत के कुर्मी सिपाही नीरज के लिए मोर्चा लिए हैं।

दिलीप के साथ महागठबंधन का कोई मजबूत चेहरा पूरे चुनाव में नहीं दिखा। इन सबके बीच राजद का कोर यादव वोटर एक कुर्मी को अपना नेता मान ले यह मुश्किल है। क्योंकि जाति के सहारे जिस लड़ाई को दिलीप ने शुरू किया उसमें यादव समाज यही सवाल कर रहा है कि हमारी जाति को बदनामी देने में आपके ही लोगों ने खूब ताली पीटी है दिलीप पटेल साहब।

आरजेडी वाले प्रत्याशी का मैनेजमेंट सबसे ज्यादा कमजोर कहा जा सकता है। राजद के मुस्लिम यादव समीकरण में पहले ही कांग्रेस ने एक मुस्लिम प्रत्याशी उतार कर दिलीप पटेल को एक झटका दे दिया है।

पटना शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन को लेकर आदर्श आचार संहिता का सख्ती कराया जा रहा अनुपालन

अरविंद केजरीवाल के पार्टी के उम्मीदवार हिमांशु पटेल नालंदा के कुछ इलाकों में खुद को कुर्मी का भविष्य बताकर ही वोट मांग रहे हैं। तो दिलीप और हिमांशु दोनों को निशांत को शांत करना है। और सारे प्रत्याशी लड़ नीरज के खिलाफ रहे, हरा नीरज कुमार को रहे हैं।

इन सबके बीच NDA का हर नेता नीरज के लिए मैदान में है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी तो पहले ही नीरज कुमार को खास किस्म डॉक्टर बता चुके हैं। तो देखिये इस बार पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव में किसकी सर्जरी होती है।

यह भी पढ़े

अन्य खबरे