वैशाली / सारण
बिहार में बाढ़ से बिगड़े हालात के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे। वैशाली और सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई और सड़क मार्ग से दौरा कर मुख्यमंत्री ने राहत शिविरों का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से सीधे संवाद किया।

इस दौरान जो तस्वीर सामने आई, उसने सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितों के लिए बने सामूहिक मेस का न सिर्फ निरीक्षण किया, बल्कि वहीं थाली लेकर पीड़ितों के बीच बैठकर वही भोजन ग्रहण किया जो बाढ़ पीड़ितों को परोसा जा रहा था।
मुख्यमंत्री ने कहा, “यह सिर्फ भोजन करना नहीं है, यह उस पीड़ा को महसूस करना है, जिसे हमारा परिवार, हमारी जनता झेल रही है। जनता का सुख-दुख अपना मानकर उनके साथ खड़ा रहना ही सच्ची जनसेवा है।”

खुद परोसा खाना, सुनी समस्याएं
राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों से एक-एक कर हाल-चाल पूछा। टेंट में रह रहे लोगों की समस्याएं सुनीं, चिकित्सा और भोजन की व्यवस्था को परखा और अधिकारियों को हर सुविधा सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने स्वयं लोगों को भोजन परोसकर उनके साथ सामूहिक भोजन किया। उनके इस आत्मीय व्यवहार से शिविर में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे।

मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। सभी बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता राशि दी जा रही है, वहीं जिन किसानों की फसलें बाढ़ में बर्बाद हुई हैं, उन्हें फसल क्षति का उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा। किसी भी पीड़ित को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा, सम्मान और राहत NDA सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन को 24 घंटे अलर्ट पर रहने और राहत कार्यों में कोई कोताही न बरतने का निर्देश दिया गया है।
मुख्यमंत्री के इस दौरे ने साबित कर दिया कि जब जनता संकट में होती है, तो उनका मुखिया उनके बीच होता है – उन्हीं के जैसा, उन्हीं के साथ।
