पटना: राजधानी के पाटलिपुत्र स्थित नोट्रे डेम अकादमी परिसर में संचालित ‘आशा किरण’ बालिका गृह की बच्चियों के लिए इस बार का ‘मदर्स डे’ यादगार बन गया। रविवार को पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू अपनी पत्नी के साथ इस आश्रय गृह पहुंचे। परित्यक्त और पीड़ित बच्चियों के बीच पहुंचकर उन्होंने न केवल उनका हौसला बढ़ाया, बल्कि उनके साथ जमीन पर बैठकर भोजन भी किया।
मुख्य न्यायाधीश और उनकी पत्नी के आगमन पर संस्थान के पदाधिकारियों और बच्चों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर बच्चियों ने सामाजिक विषयों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने मोबाइल फोन के दुष्परिणाम और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे गंभीर विषयों पर लघु नाटकों की प्रस्तुति दी। मुख्य न्यायाधीश ने बच्चों की इस प्रतिभा को देखकर उनकी जमकर सराहना की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य न्यायाधीश श्री संगम कुमार साहू ने बच्चियों से पढ़ाई, बेहतर स्वास्थ्य और अनुशासित जीवन की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लड़कियां हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। उन्होंने न्यायपालिका का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे महिलाएं वहां उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने शिक्षिकाओं से आग्रह किया कि वे इन छोटी बच्चियों में छिपी प्रतिभा को पहचानें और उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करें।
चूंकि रविवार को ‘मदर्स डे’ था, इसलिए मुख्य न्यायाधीश ने आश्रय गृह में बच्चों की देखभाल करने वाली गृह माताओं, अधीक्षकों, परामर्शदाताओं और परिवीक्षाधीन अधिकारियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि ये सभी लोग एक मां की तरह बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे हैं, जो प्रशंसनीय है।
इस दौरे का सबसे भावुक क्षण तब आया जब मुख्य न्यायाधीश और उनकी पत्नी ने खुद अपने हाथों से बच्चियों को नाश्ता परोसा। इसके बाद उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर दोपहर का भोजन किया। जाने से पहले उन्होंने आश्रय गृह के टिप्पणी रजिस्टर (Visitor’s Book) में अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया और प्रशंसा भी दर्ज की।
इस अवसर पर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, बाल संरक्षण इकाई के अतिरिक्त निदेशक सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
