Tuesday, July 21, 2026
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माटी का कर्ज़ और विकास का संकल्प: बिहार के लाल अनिल अग्रवाल ला रहे हैं ‘नंद घर’ की सौगात, अब सँवरेगा नौनिहालों का भविष्य

इंसान कामयाबी के चाहे जितने बड़े शिखर पर पहुँच जाए, लेकिन अपनी जड़ों की महक और माटी की पुकार कभी दिल से ओझल नहीं होती। बिहार की माटी से निकले दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके दिल में अपनी जन्मभूमि के लिए कितना गहरा मान-सम्मान और अपनापन है। राज्य के नौनिहालों के सुनहरे भविष्य और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के पावन संकल्प के साथ अनिल अग्रवाल फाउंडेशन ने बिहार सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत पूरे बिहार में 'नंद घर' योजना का व्यापक विस्तार किया जाएगा।

पटना।

इंसान कामयाबी के चाहे जितने बड़े शिखर पर पहुँच जाए, लेकिन अपनी जड़ों की महक और माटी की पुकार कभी दिल से ओझल नहीं होती। बिहार की माटी से निकले दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनके दिल में अपनी जन्मभूमि के लिए कितना गहरा मान-सम्मान और अपनापन है।

राज्य के नौनिहालों के सुनहरे भविष्य और महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के पावन संकल्प के साथ अनिल अग्रवाल फाउंडेशन ने बिहार सरकार के साथ एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) किया है। इसके तहत पूरे बिहार में ‘नंद घर’ योजना का व्यापक विस्तार किया जाएगा।

“बिहार की माटी ने मुझे सपने देखना और लड़ना सिखाया”

​इस भावुक अवसर पर अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोते हुए अनिल अग्रवाल ने कहा कि बिहार से उनका नाता केवल जन्म का नहीं, बल्कि उन मूल्यों और संस्कारों का है जिसने उन्हें गढ़ा है।

“बिहार से मेरा रिश्ता सिर्फ जन्म का नहीं, वहाँ से मिले मूल्यों और संस्कारों का भी है। वहीं मैंने सपने देखना सीखा, मेहनत का महत्व समझा और यह भरोसा पाया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती। आज मैं जो कुछ भी हूँ, उसमें बिहार की मिट्टी का बहुत बड़ा योगदान है। इसलिए जब भी उस धरती के लिए कुछ करने का मौका मिलता है, वह मेरे लिए सिर्फ एक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि सौभाग्य होता है।”अनिल अग्रवाल, चेयरमैन, वेदांता ग्रुप

बचपन की मजबूत नींव: संवरेंगे नौनिहाल, मुस्कुराएगा बिहार

​शास्त्रों और आधुनिक विज्ञान दोनों का मानना है कि बच्चे के जीवन के शुरुआती 6 साल उसके पूरे जीवन की नींव तय करते हैं। अनिल अग्रवाल का यह संकल्प इसी नींव को पत्थर जैसा मजबूत बनाने का है।

आधुनिक ‘नंद घर’: राज्य की पारंपरिक आंगनबाड़ियों को सर्वसुविधायुक्त ‘नंद घर’ के रूप में बदला जाएगा।

त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र: यहाँ बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार, गुणवत्तापूर्ण पोषण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिलेंगी।

आत्मविश्वास का निर्माण: इस पहल का उद्देश्य बिहार के हर ग्रामीण और वंचित बच्चे को ऐसा माहौल देना है जिससे वे बड़े होकर पूरी दुनिया में बिहार का नाम रोशन कर सकें।

आधी आबादी को संबल: महिला सशक्तिकरण की नई भोर

​एक परिवार और समाज की असली ताकत उसकी महिलाएँ होती हैं। ‘नंद घर’ केवल बच्चों का ही ठिकाना नहीं बनेगा, बल्कि यह बिहार की महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन का भी केंद्र बनेगा। यहाँ महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि वे हुनरमंद बनकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। जब एक माँ आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो पूरी पीढ़ी आने वाले कल के लिए तैयार हो जाती है।

नंद घर तो बस शुरुआत है, मंजिल औद्योगिक क्रांति है

​अपनी माटी के प्रति इस समर्पण यात्रा में अनिल अग्रवाल ने साफ किया कि बच्चों के बचपन को संवारने और महिलाओं को सशक्त करने के बाद, बिहार का औद्योगिक विकास (Industrial Development) उनकी अगली सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने बिहार सरकार, जिला प्रशासन और जमीनी अधिकारियों का दिल से शुक्रिया अदा किया, जिनके सहयोग से यह सपना धरातल पर उतर रहा है।

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