चकिया (पूर्वी चंपारण)।
कहने के लिए उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) के नियम बेहद पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल हैं। कागजी दावों में विभाग बड़े गर्व से कहता है कि आवेदन के बाद शहरी क्षेत्रों में 3 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 15 दिन के भीतर नया बिजली कनेक्शन देना अनिवार्य है। नियम यह भी कहता है कि तय समय पर मीटर न लगने पर लापरवाह अधिकारियों पर ₹1,000 प्रतिदिन का जुर्माना लगाया जाएगा।
लेकिन धरातल की हकीकत इन दावों को मुंह चिढ़ा रही है। सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये नियम सिर्फ फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए हैं? क्या बिहार के NBPDCL अधिकारियों पर कोई नियम लागू होता भी है? और अगर विभाग ने आज तक किसी लापरवाह अधिकारी से यह जुर्माना वसूला है, तो राज्य सरकार या विद्युत विभाग इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं करता? क्या सरकार को डर है कि रिपोर्ट सामने आने से उसकी कार्यक्षमता की पोल खुल जाएगी?
इन सवालों को हवा दी है पूर्वी चंपारण जिले के चकिया प्रखंड से सामने आए एक चौंकाने वाले मामले ने, जिसने बिजली विभाग के दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं।
जब भाजपा नेता का ही नहीं लग रहा मीटर, तो आम जनता का क्या होगा?
मामला किसी आम नागरिक का नहीं, बल्कि सूबे की सत्ताधारी पार्टी के एक रसूखदार नेता का है। भाजपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य वीरेंद्र कुशवाहा ने चकिया बाजार स्थित अपने नवनिर्मित मकान के लिए गत 1 अप्रैल 2026 को नए विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। उनका आवेदन क्रमांक 520418327515 है।
नियम बनाम हकीकत:
नियम के मुताबिक चकिया बाजार जैसे शहरी/अर्ध-शहरी इलाके में 3 से 7 दिनों के भीतर कनेक्शन मिल जाना चाहिए था। लेकिन आज आवेदन किए हुए ढाई महीने से अधिक का समय बीत चुका है, और वीरेंद्र कुशवाहा के घर में अंधेरा पसरा है।
विभागीय उदासीनता का आलम यह है कि भाजपा नेता क्षेत्र के कनिष्ठ अभियंता (JE) से लेकर वरिष्ठ अधिकारी एसडीओ (SDO) तक को फोन कर-करके थक चुके हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहा। हद तो तब हो गई जब अधिकारियों ने अब सत्ताधारी दल के नेता का ही फोन उठाना बंद कर दिया है।
अब सोचिए, जब बिहार में भाजपा सरकार के अपने प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य को एक बिजली कनेक्शन के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं और उनके फोन तक नहीं उठाए जा रहे, तो उस राज्य की आम जनता के साथ ये अधिकारी क्या सलूक करते होंगे? आम लोगों की फरियाद तो शायद इन दफ्तरों की फाइलों में ही दफन हो जाती होगी।
‘न्यूजलहर’ के फोन से भी भागे जिम्मेदार अधिकारी
इस पूरे मामले पर पक्ष जानने के लिए जब ‘न्यूजलहर’ की टीम ने चकिया NBPDCL के कनिष्ठ अभियंता (JE) 77638148.. और एसडीओ (SDO) से 77638188.. फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो विभाग की ‘अस्पष्टता’ और ‘लापरवाही’ एक बार फिर उजागर हो गई। दोनों ही अधिकारियों ने बार-बार घंटी बजने के बावजूद फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा।
अधिकारियों का यह रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें न तो जनता की परेशानियों से कोई सरोकार है और न ही सरकार के सख्त नियमों का कोई डर।
जनता पूछ रही है सवाल: कहाँ है वो ₹1000 का जुर्माना?
वीरेंद्र कुशवाहा के मामले को अगर आधार बनाया जाए, तो ढाई महीने (करीब 75 दिन) की देरी के हिसाब से दोषी अधिकारियों पर अब तक हजारों रुपये का जुर्माना लग जाना चाहिए था।
क्या विद्युत विभाग वीरेंद्र कुशवाहा के मामले में दोषी अधिकारियों पर ₹1,000 प्रतिदिन का जुर्माना लगाएगा?
क्या राज्य सरकार इस जुर्माने की राशि को वसूल कर पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देगी?
विद्युत विभाग ऐसी कार्यवाहियों को सार्वजनिक क्यों नहीं करता ताकि जनता में पारदर्शिता का भरोसा जगे?
चकिया का यह मामला साफ संकेत है कि NBPDCL में नियम सिर्फ जनता को बहलाने के लिए हैं, जबकि अधिकारियों की मनमानी और सुस्ती आज भी बदस्तूर जारी है। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद सरकार के कान पर जूं रेंगती है या वीरेंद्र कुशवाहा की तरह ही आम बिहारी भी अंधेरे में रहकर अधिकारियों के फोन उठने का इंतजार करता रहेगा।
