Thursday, September 10, 2026
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मनेर विधायक भाई वीरेंद्र का सरकार पर बड़ा हमला: “केवल हवाई सर्वेक्षण से नहीं रुकती बाढ़, फरक्का समझौता है असली तबाही की जड़”

पटना: बिहार में बाढ़ से उपजे हालात और प्रशासनिक प्रतिक्रिया को लेकर मनेर से राजद के वरिष्ठ विधायक और राजद के मुख्य प्रवक्ता रहे भाई वीरेंद्र ने राज्य की एनडीए (भाजपा-जदयू) सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री द्वारा किए जा रहे हवाई दौरों को “दिखावा” बताते हुए उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर से नीचे झांकने से प्राकृतिक आपदा से परेशान असहाय जनता का दर्द कम नहीं होता।

मनेर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने बिहार में हर साल आने वाली जल प्रलय को राजनीतिक और नीतिगत विफलता से जोड़ते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

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1. “दिखावे का हवाई सर्वेक्षण और जनता बेबस”

भाई वीरेंद्र ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब क्षेत्र की जनता उफनती नदियों और पानी के बीच जिंदगी की जंग लड़ रही है, तब सत्ताधारी दल के नेता केवल हवाई निरीक्षण कर संवेदनशीलता दिखाने का नाटक कर रहे हैं।

नीतियों का अभाव: सरकार बाढ़ राहत और राहत सामग्रियों के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देती है, लेकिन इसका कोई स्थाई या ठोस समाधान निकालने के लिए उपयोजना स्तर पर काम नहीं करती।

नियति बन चुकी त्रासदी: अधिकारियों और नेताओं के हवाई दौरों के बाद भी जनता को निसहाय होकर महीनों तक पानी घटने का इंतजार करना पड़ता है। हर साल घर-बार और फसलें डूबना अब बिहार वासियों की नियति बना दिया गया है।

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2. “1996 का फरक्का बैराज समझौता ही बिहार का असली अभिशाप”

बाढ़ के ऐतिहासिक और तकनीकी कारणों की परतें खोलते हुए विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि बिहार में बाढ़ की विभीषिका के लिए वर्ष 1996 में हुआ भारत-बांग्लादेश फरक्का बैराज जल समझौता मुख्य रूप से जिम्मेदार है।

किसानों के साथ अन्याय: फरक्का समझौते की शर्तों के अनुसार, जब शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में बिहार के किसानों को सिंचाई और गंगा के पानी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है, तब अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के तहत यह पानी बांग्लादेश के लिए छोड़ दिया जाता है।

गाद (सिल्ट) से पटी नदियाँ: इस समझौते के बाद बैराज के पीछे गंगा नदी का प्रवाह थमने से अरबों टन मिट्टी और गाद (Silt) बिहार के क्षेत्र (बक्सर से भागलपुर तक) में जम गई है। नदी का तल उथला होने के कारण मानसून में जरा सा पानी बढ़ते ही गंगा उफान मारकर रिहाइशी इलाकों को डुबो देती है।

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3. “भ्रम फैला रही सरकार, 2026 की समीक्षा पर चुप क्यों?”

भाई वीरेंद्र ने सत्ताधारी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे अपनी नीतिगत नाकामियों और ऐतिहासिक गलतियों को छुपाने के लिए बड़े-बड़े बयान दे रहे हैं और आम जनता को गुमराह कर रहे हैं।

2026 में संधि की मियाद: राजद नेता ने ध्यान दिलाया कि 1996 में हुई इस 30-वर्षीय जल संधि की समय-सीमा अब पूरी होने की ओर है। ऐसे में सरकार को चुनावी जुमलेबाजी और हवाई दौरे छोड़कर केंद्र सरकार पर यह दबाव बनाना चाहिए कि इस संधि का पुनरीक्षण (Review) किया जाए और बिहार के जल-अधिकारों व गाद-प्रबंधन नीति (Silt Management Policy) को प्राथमिकता दी जाए।

मनेर विधायक भाई वीरेंद्र के इस कड़े रुख ने बिहार की बाढ़ राजनीति को एक नई दिशा दे दी है। उनके अनुसार, बिहार की जनता अब हवाई दावों और झांसों में आने वाली नहीं है; राज्य को सिर्फ हेलीकॉप्टर दौरों की नहीं, बल्कि फरक्का बैराज और गाद नीति पर एक निर्णायक दीर्घकालिक कदम की जरूरत है।

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