Sunday, August 16, 2026
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यह लड़ाई आज के लिए नहीं, आने वाले सौ वर्षों के लिए है’. 80वें स्वतंत्रता दिवस पर गर्दनीबाग धरना स्थल से आंदोलनकारियों का संकल्प

आमरण अनशन 12वें दिन भी जारी

पटना, 15 अगस्त 2026। देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, वहीं पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर बिहार के अतिथि शिक्षकों, शोधार्थियों एवं सहायक प्राध्यापक अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आमरण अनशन सह महाधरना 12वें दिन भी जारी रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर धरना स्थल पर तिरंगा फहराया गया। पिछले 12 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे ऑल पीएच.डी. होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार के प्रदेश संयोजक कुमुद पटेल ने ध्वजारोहण किया।

तिरंगा फहराने के बाद आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए कुमुद पटेल ने कहा, “यह लड़ाई आज के लिए नहीं, आने वाले सौ वर्षों के लिए है।” उन्होंने कहा कि यह संघर्ष किसी एक भर्ती, विज्ञापन या कुछ व्यक्तियों के हित तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार में उच्च शिक्षा की दिशा, शोधार्थियों के सम्मान, युवाओं के रोजगार और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

कुमुद पटेल ने स्पष्ट किया कि सरकार जब तक आंदोलनकारियों की छह सूत्री मांगों पर ठोस एवं लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।

गर्दनीबाग में 4 अगस्त से चल रहे आंदोलन के दौरान शोधार्थियों एवं अभ्यर्थियों ने बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था और सहायक प्राध्यापक नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़ी कई विसंगतियों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी हैं। आंदोलनकारियों ने विशेष रूप से UGC Regulation 2018 एवं Table 3A को लागू करने, PhD/NET/JRF जैसी उच्च शैक्षणिक एवं शोध योग्यताओं को उचित वेटेज देने, सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करने, रिक्त पदों पर स्थायी एवं नियमित नियुक्ति करने, डोमिसाइल नीति लागू करने तथा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की स्वायत्तता की रक्षा करने की मांग की है।

आंदोलनकारियों ने बिहार के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा सामंजन की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि नियमित नियुक्ति होने तक लंबे समय से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए और उन्हें सेवा-संरक्षण दिया जाना चाहिए।

आंदोलनकारियों ने 1 जुलाई 2026 को जारी सहायक प्राध्यापक नियुक्ति संबंधी परिनियम में पीएच.डी. के लिए निर्धारित 11 अंकों के वेटेज पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उनका कहना है कि पूर्ववर्ती यूजीसी प्रावधानों में पीएच.डी. जैसी उच्च शोध योग्यता को अधिक महत्व दिया जाता था। इसके विपरीत नए प्रावधान में वेटेज कम किया जाना शोधार्थियों के हित में नहीं है। आंदोलनकारियों ने यह सवाल भी उठाया कि बिहार में एमफिल की पढ़ाई नहीं होने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया में एमफिल को वेटेज दिया गया है।

धरना स्थल पर आंदोलनकारियों ने कहा कि उच्च शिक्षा में पारदर्शी, न्यायपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण नियुक्ति व्यवस्था स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उनका कहना है कि यदि शोध एवं उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को उचित महत्व नहीं दिया गया तो इसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था पर पड़ेगा।

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराते हुए आंदोलनकारियों ने लोकतांत्रिक अधिकारों, समान अवसर, न्यायपूर्ण नियुक्ति व्यवस्था और उच्च शिक्षा की मजबूती के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। आंदोलनकारियों ने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा, जब युवाओं और शोधार्थियों को सम्मान, समान अवसर, रोजगार और न्याय मिले।

इस बीच आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों तथा शिक्षाविदों का समर्थन मिल रहा है। सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव 16 अगस्त को गर्दनीबाग स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन के समर्थन में उपवास रखेंगे।

आंदोलन के 12वें दिन धरना स्थल पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं, पीएच.डी. धारकों एवं रिसर्च स्कॉलर्स के साथ पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना के सीनेट सदस्य अजय यादव, डॉ. आसिफ अली, डॉ. विभा, डॉ. संगीता कुमारी, डॉ. लक्ष्मी, डॉ. कुंदन सिंह, मोनू यादव, डॉ. उमेश कुमार, नितेश पटेल, डॉ. विनय उपाध्याय, डॉ. आयुष पटेल सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

आंदोलनकारियों ने एक स्वर में कहा कि यह लड़ाई केवल आज के रोजगार और नियुक्ति की नहीं, बल्कि बिहार की उच्च शिक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। “यह लड़ाई आज के लिए नहीं, आने वाले सौ वर्षों के लिए है”—कुमुद पटेल का यह संदेश स्वतंत्रता दिवस पर गर्दनीबाग आंदोलन का प्रमुख संकल्प बनकर उभरा।

आंदोलनकारियों ने दोहराया कि सरकार के लिखित आश्वासन और मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आमरण अनशन एवं महाधरना जारी रहेगा।

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