व्यवस्था परिवर्तन के वादे पर टिकट का पेंच, जन सुराज में पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी
कस्तूरी यादवव्यवस्था परिवर्तन के वादे पर टिकट का पेंच, जन सुराज में पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी
पटना, 29 सितंबर। बिहार में ‘सही लोग, सही सोच और व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के साथ राजनीति में उतरी जन सुराज पार्टी अपने पहले ही बड़े इम्तिहान में घिरती नजर आ रही है। पार्टी की ओर से जारी की गई संभावित उम्मीदवारों की सूची के बाद संगठन के अंदर से ही सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई टिकट ऐसे चेहरों को दिए गए हैं जो कुछ महीने पहले तक अन्य दलों में सक्रिय थे। इससे उन कार्यकर्ताओं में नाराजगी है जिन्होंने पिछले दो-तीन सालों से पदयात्रा और संगठन निर्माण में समय दिया है।
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पटना में पार्टी से जुड़े एक पुराने कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमने बूथ स्तर पर संगठन खड़ा किया, लेकिन जब टिकट की बारी आई तो बाहर से आए लोगों को प्राथमिकता मिल रही है।”
विवाद की दूसरी वजह उम्मीदवारों की पेशेवर पृष्ठभूमि है। लिस्ट में डॉक्टर, शिक्षाविद और व्यवसायी वर्ग के लोगों की संख्या ज्यादा है। पार्टी के अंदर ही सवाल है कि क्या टिकट का आधार संगठन के प्रति निष्ठा और जनाधार है या चुनावी समीकरण?
इस बीच दरभंगा स्नातक और तिरहुत शिक्षक MLC सीट पर उम्मीदवार बदलने की घटना ने बहस को और तेज कर दिया है। पहले एक नाम पर चर्चा हुई और बाद में दूसरा नाम सामने आने से कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि खुद को पुरानी पार्टियों का विकल्प बताने वाली पार्टी के लिए यह अग्निपरीक्षा है। अब देखना होगा कि क्या जन सुराज अपने उम्मीदवार चयन के मापदंड सार्वजनिक करती है।
कस्तूरी यादव – लेखक राजनैतिक समीक्षक के रूप में newslahar.com में कार्य कर रही है। और जनसुराज के गतिविधियों को शुरुवाती दिनों से नजदीक से देखती रही है
