अहमदाबाद/राजकोट (गुजरात):
डेयरी क्षेत्र में वैज्ञानिक पशुपालन और किसानों की समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, माहि मिल्क प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (Maahi MPO) ने अपने सदस्य किसानों के लिए स्वदेशी जेंडर-सॉर्टेड सीमेन (Gender-Sorted Semen) तकनीक ‘GauSort’ को लॉन्च किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक की शुरुआत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और NDDB डेयरी सर्विसेज (NDS) के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने माहि MPO के बोर्ड सदस्यों की उपस्थिति में की।
इस नई पहल से डेयरी किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली बछड़ियों (Female Calves) के जन्म की दर बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे न केवल भविष्य में दूध का उत्पादन बढ़ेगा बल्कि आवारा पशुओं की समस्या से भी राहत मिलेगी।

क्या है ‘GauSort’ तकनीक और इसके फायदे?
- राष्ट्रीय गोकुल मिशन का हिस्सा: यह तकनीक केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत लागू की जा रही है, जो पशुओं के वैज्ञानिक प्रजनन को बढ़ावा देती है।
- 90% से अधिक बछड़ियों के जन्म की संभावना: इस सीमेन के उपयोग से बछड़ियों के जन्म की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे किसानों को अनुपयोगी बछड़ों (Male Calves) के पालन-पोषण के खर्च से मुक्ति मिलती है।
- नस्ल सुधार और अधिक मुनाफा: यह उच्च आनुवंशिक (Genetic) गुणवत्ता वाले पशुधन को तैयार करने में मदद करेगी, जिससे भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आय दोगुनी होगी।
“GauSort तकनीक वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन और आत्मनिर्भर डेयरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। गुजरात के माहि MPO क्षेत्र में इसे अपनाने से पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार होगा और उत्पादकता बढ़ेगी। मुझे पूरा विश्वास है कि गुजरात के किसान इस तकनीक को अपनाकर अपनी डेयरी आय को और मजबूत करेंगे।”
— डॉ. मीनेश शाह, चेयरमैन (NDDB और NDS)
‘माहि पशु सेवा’ के जरिए सीधे घर तक पहुँचेगी सुविधा
माहि MPO अपने किसानों के लिए पहले से ही ‘माहि पशु सेवा’ नाम से एक डिजिटल डोरस्टेप वेटरनरी हेल्थ सर्विस (DVHS) चला रहा है। इसके तहत पशुपालकों को उनके घर पर ही पशु स्वास्थ्य, कृत्रिम गर्भाधान, पोषण और प्रबंधन की सेवाएँ दी जाती हैं।
अब किसानों को इस नई ‘GauSort’ सुविधा का लाभ भी इसी ‘माहि पशु सेवा’ के माध्यम से उनके घर पर ही उपलब्ध कराया जाएगा। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पशुओं के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड रखने के साथ-साथ समय पर सटीक इलाज सुनिश्चित करता है, जिससे हजारों दुग्ध उत्पादक पहले से ही लाभान्वित हो रहे हैं।
