किराए में बढ़ोतरी: हज कमेटी ने हवाई किराए में 10,000 रुपये ($100 USD) का इजाफा किया है.
कारण: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के चलते ग्लोबल एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी उछाल.
अंतिम तिथि: तीर्थयात्रियों को 15 मई तक बढ़ी हुई अंतर राशि जमा करनी होगी.
राजनीतिक विरोध: विपक्ष ने सरकार से इस बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग की है.
नई दिल्ली:
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और युद्ध के हालातों का सीधा असर अब भारत के हज यात्रियों पर पड़ा है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी को देखते हुए हज कमेटी ने हवाई किराए में 10,000 रुपये (लगभग 100 USD) की एकमुश्त वृद्धि करने का फैसला किया है. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाली हज कमेटी के इस अचानक आए फैसले से इस साल यात्रा पर जाने वाले जायरीनों में भारी नाराजगी और असंतोष है.
ईंधन की कीमतों में दोगुने से ज्यादा का उछाल
सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक सर्कुलर में इस बढ़ोतरी को मजबूरी बताया गया है. सर्कुलर के अनुसार, मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) के मौजूदा संकटपूर्ण हालातों के कारण हवाई किराए में यह ‘वन-टाइम’ (एक बार का) बदलाव करना जरूरी हो गया था. गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर ATF की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं. सामान्य तौर पर किसी भी एयरलाइन के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 30% से 40% हिस्सा सिर्फ ईंधन पर खर्च होता है, ऐसे में ATF के दाम बढ़ने से विमानन कंपनियों का बजट पूरी तरह गड़बड़ा गया है.
हर जायरीन पर पड़ेगा असर, 15 मई तक करना होगा भुगतान
हज कमेटी के सर्कुलर में साफ किया गया है:
”संशोधित हवाई किराए के तहत प्रत्येक जायरीन को 100 USD (लगभग 10,000 रुपये) की अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा, चाहे वे देश के किसी भी हिस्से या प्रस्थान बिंदु (इम्बार्केशन पॉइंट) से अपनी यात्रा शुरू कर रहे हों. यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ तीर्थयात्रियों को ही उठाना होगा.“
कमेटी ने आदेश दिया है कि इस साल हज पर जाने वाले सभी यात्रियों को 15 मई तक किराए की यह अंतर राशि अनिवार्य रूप से जमा करानी होगी.
सियासी पारा चढ़ा: विपक्ष ने की फैसले को वापस लेने की मांग
इस फैसले के सामने आते ही देश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम को हज यात्रियों पर अतिरिक्त और अनुचित आर्थिक बोझ बताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है. विपक्ष का कहना है कि सरकार को इस वैश्विक संकट के समय यात्रियों को सब्सिडी या राहत देनी चाहिए थी, न कि उन पर बोझ डालना चाहिए था. विपक्षी दलों ने सरकार से इस किराए बढ़ोतरी को यथाशीघ्र वापस लेने की मांग की है.
