पटना। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में केवल फाइलों का निपटारा पर्याप्त नहीं है, बल्कि आम जनता का संतुष्टि स्तर सबसे महत्वपूर्ण है। सोमवार को समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम और आरटीपीएस (RTPS) के मामलों की गहन समीक्षा की और अधिकारियों को ‘ईज ऑफ लिविंग’ के संकल्प के साथ काम करने का निर्देश दिया।
बैठक में जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि लोक शिकायत निवारण के मामलों में जिन अधिकारियों पर दंड लगाया गया है, वे तीन दिनों के भीतर राशि जमा करें। साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों का वेतन निकासी अवरूद्ध करने का आदेश दिया गया है। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को निर्देश दिया कि आरटीपीएस में हर एक ‘एक्सपायर्ड’ आवेदन पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार दंड आरोपित कर तीन दिनों में रिपोर्ट सौंपें।
समीक्षा के दौरान यह सुखद तथ्य सामने आया कि जिले में लोक शिकायत निवारण का एक भी आवेदन समय-सीमा से बाहर (Expired) नहीं है। 60 कार्य दिवसों से अधिक का कोई भी मामला लंबित न रहने पर जिलाधिकारी ने अधिकारियों की प्रशंसा की और इस मानक को भविष्य में भी बनाए रखने को कहा।
संयुक्त शनिवारीय बैठक: भूमि विवादों के त्वरित समाधान के लिए हर शनिवार को अंचलाधिकारी (CO) और थानाध्यक्ष की संयुक्त बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित करने का निर्देश दिया गया। इसे ‘भू-समाधान पोर्टल’ पर भी अपडेट करना होगा।
राशन कार्ड: जिलाधिकारी ने राशन कार्ड से संबंधित लंबित आवेदनों को कैंप लगाकर वितरित करने और नए कार्डधारियों को समय से खाद्यान्न आपूर्ति सुनिश्चित करने का आदेश दिया। उन्होंने इसे अनुमंडल पदाधिकारियों का ‘कोर’ कार्य बताया।
आम जनता को बेहतर सुविधा देने के लिए जिले के आरटीपीएस केंद्रों को आधुनिक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ और सुंदर बनाया जाएगा। उप विकास आयुक्त (DDC) को इन केंद्रों का नियमित निरीक्षण करने और चेकलिस्ट के आधार पर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
”लोक शिकायत निवारण और आरटीपीएस का सफल क्रियान्वयन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ जन-कार्यों के प्रति संवेदनशीलता अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” — डॉ. त्यागराजन एस.एम., जिलाधिकारी, पटना
