Saturday, April 18, 2026
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महिला आरक्षण पर श्रेयसी सिंह के वार पर पलटवार: ‘शंभू हॉस्टल कांड’ में बिहार सरकार मौन क्यों??

पटना: महिला आरक्षण बिल के पारित न होने पर पूर्व मंत्री और भाजपा नेता श्रेयसी सिंह द्वारा विपक्षी दलों पर किए गए तीखे हमलों ने बिहार की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। जहाँ एक ओर श्रेयसी सिंह कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को ‘महिला विरोधी’ करार दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर आम जनता और सोशल मीडिया पर लोग उनसे बिहार की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर कड़े सवाल पूछ रहे हैं।

श्रेयसी सिंह का आरोप: विपक्ष महिला विरोधी

​हालिया बयानों में श्रेयसी सिंह ने कहा कि NDA को छोड़कर बाकी सभी पार्टियां महिलाओं का सम्मान नहीं करतीं और आरक्षण बिल में बाधा डालना उनकी इसी मानसिकता का प्रतीक है। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।

शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड: जनता के चुभते सवाल

​श्रेयसी सिंह के ‘महिला सम्मान’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए बिहार की जनता ने पटना के चर्चित शंभू गर्ल्स हॉस्टल कांड की याद दिलाई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे संदेशों में पूर्व मंत्री से सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं:

न्याय कहाँ है? पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट (NEET) की छात्रा के साथ हुए कथित बलात्कार और हत्या के मामले में अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पुलिस की भूमिका पर सवाल: जांच के दौरान पुलिस की कार्यशैली को बिहार के इतिहास का “काला अध्याय” बताया जा रहा है। जनता का आरोप है कि न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई।

CBI और चार्जशीट का मुद्दा: सबसे गंभीर आरोप यह लगाया जा रहा है कि देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी (CBI) के होने के बावजूद समय पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकी, जिसके परिणामस्वरूप मुख्य आरोपी जेल से बाहर आ गया।

​’ढोंग और दिखावा’ या वास्तविक चिंता?

​आक्रोशित नागरिकों का कहना है कि एक तरफ महिला आरक्षण की बात करना और दूसरी तरफ राज्य में हो रहे जघन्य अपराधों पर चुप्पी साधना, सत्ता पक्ष के दोहरे चरित्र को दर्शाता है। पोस्ट के माध्यम से पूछा गया है, “मैडम, क्या वह छात्रा महिला नहीं थी? उसके सम्मान के लिए आपकी सरकार ने क्या किया? क्या केवल बिल पास करना ही महिला सम्मान है, या उन्हें सुरक्षा और न्याय देना भी?”

​महिला आरक्षण बिल पर श्रेयसी सिंह का आक्रामक रुख अब उन्हीं की ओर मुड़ता दिख रहा है। बिहार की जनता अब केवल आश्वासनों और राजनीतिक बयानों से संतुष्ट नहीं है; वे जमीनी स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा और अपराधियों को सजा दिलाने की जवाबदेही मांग रहे हैं।

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