पटना, 6 अगस्त 2025 — बिहार में मतदाता पुनर निरीक्षण अभियान को लेकर जहां विपक्षी दल राज्य और केंद्र स्तर पर लगातार चुनाव आयोग के प्रयासों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं जमीनी स्तर पर वे खुद आयोग के “कोई मतदाता न छूटे” अभियान में भागीदारी नहीं कर रहे हैं।
विगत सप्ताहों में विभिन्न दलों ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध, प्रदर्शन और आयोग की आलोचना तेज की थी, लेकिन 1 अगस्त को जारी हुई प्रारूप मतदाता सूची पर अब तक किसी भी दल ने कोई दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
पटना जिलाधिकारी कार्यालय से प्राप्त संक्षिप्त प्रेस नोट के अनुसार, 1 अगस्त से 6 अगस्त की सुबह तक सभी 13 प्रमुख राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए गए, जिनकी संख्या 1,60,813 है। इन एजेंटों के माध्यम से दावे या आपत्तियां दर्ज कराना अपेक्षित था, परंतु अब तक शून्य आवेदन/आपत्तियां सामने आई हैं।
इसके विपरीत, आम नागरिकों की ओर से 3,659 दावे-आपत्तियाँ प्राप्त हुईं और 19,186 नए मतदाताओं ने फॉर्म-6 के जरिये नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन किया है।
यह स्थिति विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची की शुद्धता पर उठाए जा रहे प्रश्नों को और भी संदिग्ध बना देती है। एक ओर वे बिहार में व्यापक पैमाने पर मतदाता पुनर निरीक्षण अभियान को लेकर आंदोलन करते दिख रहे हैं और आयोग को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं, दूसरी ओर आयोग द्वारा त्रुटिहीन सूची तैयार कराने के लिए दी गई खुली भागीदारी के अवसर का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर विपक्ष को वास्तव में मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका है, तो दावे-आपत्ति प्रक्रिया में भागीदार बनकर वह ठोस प्रमाण और जानकारी प्रस्तुत कर सकता था। ऐसे में मौजूदा रवैये से उनके इरादे और मंशा पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
चुनाव आयोग ने भी एक बार फिर सभी दलों और मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी भी त्रुटि की जानकारी दें, ताकि अंतिम मतदाता सूची पूर्णतया निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाई जा सके।
