नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए संसद की तीन प्रमुख वित्तीय समितियों और एक महत्वपूर्ण स्थायी समिति का पुनर्गठन कर दिया है। इन समितियों का नया कार्यकाल 1 मई 2026 से प्रभावी हो गया है, जो 30 अप्रैल 2027 तक चलेगा। खास बात यह है कि पारदर्शिता और अनुभव को प्राथमिकता देते हुए कई पुराने चेहरों को दोबारा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रमुख नियुक्तियां और समितियां
संसदीय कार्यप्रणाली में ‘वॉचडॉग’ की भूमिका निभाने वाली इन समितियों के अध्यक्षों की सूची इस प्रकार है:
लोक लेखा समिति (PAC): कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल को एक बार फिर इस शक्तिशाली समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह समिति सरकारी खर्चों के लेखा-जोखा की बारीकी से जांच करती है।
लोक उपक्रम समिति (COPU): भाजपा सांसद संजय जायसवाल को दोबारा इस समिति की कमान सौंपी गई है। यह समिति सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के कामकाज और उनकी कार्यकुशलता की समीक्षा करती है।
प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): भाजपा के बैजयंत जय पांडा को फिर से अध्यक्ष बनाया गया है। यह समिति सरकारी अनुमानों की जांच कर प्रशासन में दक्षता और मितव्ययिता के सुझाव देती है।
अनुसूचित जाति और जनजाति कल्याण समिति: भाजपा सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते को इस स्थायी समिति का अध्यक्ष बरकरार रखा गया है। यह समिति हाशिए पर मौजूद समुदायों के संवैधानिक अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करती है।

क्यों महत्वपूर्ण हैं ये समितियां?
संसदीय लोकतंत्र में ये समितियां “लघु संसद” के रूप में कार्य करती हैं। चूंकि संसद के पास हर विभाग के खर्च और नीतियों पर विस्तार से चर्चा करने का समय सीमित होता है, इसलिए ये समितियां विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ मिलकर फाइलों की गहन जांच करती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य जनता के पैसे (Taxpayer’s Money) के सही उपयोग को सुनिश्चित करना और कार्यपालिका (सरकार) को विधायिका के प्रति जवाबदेह बनाना है।
इन समितियों का पुनर्गठन हर साल किया जाता है ताकि विधायी नियंत्रण में निरंतरता बनी रहे। 1 मई से शुरू हुआ यह नया सत्र अगले साल अप्रैल के अंत तक जारी रहेगा।
