पटना। बिहार में पिछले दो महीनों से जमीन संबंधी कार्यों के लिए परेशान आम जनता के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में 9 मार्च से जारी बिहार राजस्व सेवा संघ के अधिकारियों का सामूहिक अवकाश गुरुवार को समाप्त हो गया। सरकार द्वारा मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के आश्वासन के बाद यह गतिरोध दूर हुआ है। आगामी 4 मई से सभी राजस्व अधिकारी अपने कार्यों पर लौट आएंगे, जिससे ठप पड़े जमीन से जुड़े कार्यों में एक बार फिर रफ्तार आएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव श्री जय सिंह ने बताया कि सामूहिक अवकाश के कारण राज्य भर में दाखिल-खारिज (Mutation), परिमार्जन, भूमि मापी और विवादों के निपटारे जैसे महत्वपूर्ण कार्य पूरी तरह प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि विभाग की पहली प्राथमिकता अब इन लंबित मामलों का त्वरित और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना है।
सचिव ने स्पष्ट किया कि 4 मई से सभी अधिकारियों को अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान देना अनिवार्य होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अनुपस्थित रहने या कार्य में लापरवाही बरतने पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही:
विशेष मॉनिटरिंग: कार्यों की प्रगति पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर विशेष निगरानी की व्यवस्था की जाएगी।
प्राथमिकता सूची: लंबित आवेदनों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर उनके निपटारे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
हड़ताल समाप्त होने का मुख्य कारण सरकार का वह आश्वासन है, जिसमें अधिकारियों की जायज मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए व्यावहारिक समाधान निकालने की बात कही गई है। सरकार का लक्ष्य है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने जिससे प्रशासनिक कार्य बाधित हों।
इस फैसले से बिहार के लाखों रैयतों और किसानों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जो पिछले 52 दिनों से अपने भूमि संबंधी दस्तावेजों के लिए अंचलों के चक्कर काट रहे थे।
