बिहार की राजधानी पटना में जनवरी माह में नीट परीक्षा की तैयारी हॉस्टल में रहकर कर रही छात्रा की संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके साथ दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि हुई थी। और संबंधित अस्पताल प्रबंधन पर भी मामले को निपटाने के लिए छात्रा की हत्या किए जाने का आरोप लगा था।
मामले पर बवाल बढ़ने पर तात्कालीन राज्य सरकार ने स्थानीय पुलिस के बाद सीआईडी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी। और परिणाम नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने SIT गठित कर जांच करवाए और वहां भी परिणाम नहीं मिलने पर केंद्रीय जांच एजेंसी CBI को जांच सौंपी।
आश्चर्यजनक रूप से सीबीआई ने भी इस मामले लीपापोती का ही काम किया। और इस मामले की अन्य जांच एजेंसीयों की तरह सीबीआई का भी पूरा प्रयास रहा की कैसे भी इस मामले में परिवार के सदस्यों को फसाया जाए। लेकिन अनेक प्रयास के बावजूद पीड़िता पक्ष की सतर्कता और निडरता के कारण CBI वालो की दाल नहीं गली।
और अंत में सीबीआई ने इस मामले के सभी वांछित आरोपियों को बचाने के लिए अपने तरकश से ब्रह्मास्त्र निकाल लिया। मतलब सीबीआई ने इस मामले में गिरफ्तार एकमात्र आरोपी मनीष रंजन के गिरफ्तारी के 90 दिन बीत जाने के बाद भी चार्जशीट ही नहीं बनाई। और इसी आधार पर पोक्सो कोर्ट में आरोपी मनीष रंजन को जमानत मिल गई।
इस मामले में शुरुआत से राज्य सरकार का रवैया पक्षपात पूर्ण रहा है। और सरकार इस मामले में कैसे आरोपियों को जेल से रिहाई मिल जाए बस इसी पर ध्यान केंद्रित कर अपने अधीनस्थ जांच एजेंसियों को दिशानिर्देश देती हुई दिखी।
लेकिन पीड़िता पक्ष ने अभी तक हार नहीं मानी है। पीड़िता पक्ष के समर्थन में अनेक पत्रकार अपनी जान और करियर की परवाह किए बिना पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे है। और इस कारण राज्य के सत्ताधारी गठबंधन NDA के नेताओं को सार्वजनिक रूप से प्रेस वार्ता करना मुश्किल हो गया है।
केंद्र सरकार द्वारा पिछले दिनों संसद में लाई गई महिला बिल का विपक्षी विरोध के कारण पास नहीं हुआ। इस कारण पूरे देश भर में NDA समर्थित दल विपक्षी दलों को कोसते हुए विरोध प्रदर्शन किया। लेकिन बिहार में NDA नेता और नेत्रियों को इस मुद्दे को उठाने के दौरान हर कदम पर फजीहत का सामना करना पड़ा है।
भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद में NDA की महिला नेताओं ने जब पत्रकारों को विपक्षी दलों के महिला विरोधी होने की बारे में विस्तार से बता रही थी। तभी अनेक पत्रकारों ने NDA पत्रकार परिषद में उपस्थिति महिला विधायक श्रेषी सिंह, लेशी सिंह, से सीधा और तीखा सवाल किया था।
जिससे नाराज होकर भाजपा के इन महिला विधायकों ने उस पत्रकार को जबरन भाजपा कार्यालय से बाहर करवा दिया था। इन पत्रकारों का सीधा सवाल था कि आप NDA की महिला विधायक विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रहे हो। लेकिन पटना नीट छात्रा मामले में आप सब महिला विधायक कहां थी। उसको इंसाफ दिलाने के लिए आपलोग आवाज क्यों नहीं उठा रहे हो
ऐसी ही फजीहत कल गया के एक कार्यक्रम में शिरकत के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को भी झेलनी पड़ी जब गाड़ी से उतरते ही पत्रकार ने चिल्लाते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूछा राज्य में एनकाउंटर हो रहा है। नीट छात्रा मामले का आरोपी का एनकाउंटर कब होगा मुख्यमंत्री जी?
अपने हाव भाव से दिखा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी उक्त पत्रकार की आवाज सुन रहे थे और जानबूझकर कोई प्रतिक्रिया देना टाल गए। ऐसे में यह कहना कि पटना नीट छात्रा मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी चौधरी के NDA के सभी नेता नेत्री मुंह छुपाकर भागते दिख रहे है। कही से भी गलत नहीं होगा।
