मनेर में बड़ी मुठभेड़, पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड के 3 शूटर ढेर, थानाध्यक्ष जख्मी
बिष्णु नारायण चौबे
पटना पुलिस और एसटीएफ (STF) ने एक संयुक्त कार्रवाई के तहत शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे गंगा नदी के दियारा इलाके में अपराधियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन चलाया। दोनों पक्षों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में तीन कुख्यात अपराधी मारे गए, जबकि मनेर थानाध्यक्ष गंभीर रूप से घायल हो गए।
समय और स्थान: शुक्रवार सुबह करीब 3:00 बजे, शेरपुर गंगा नदी दियारा इलाका (मनेर थाना क्षेत्र, पटना)।
पुलिस कार्रवाई: पटना पुलिस और एसटीएफ का संयुक्त ऑपरेशन।
मुठभेड़ का परिणाम: पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड के 3 कुख्यात शूटर व साजिशकर्ता ढेर।
घायल अधिकारी: मनेर थानाध्यक्ष रजनीश कुमार के बाएं हाथ में गोली लगी; उन्हें बेहतर इलाज के लिए तुरंत पटना रेफर किया गया।
बरामदगी: घटनास्थल से दो पिस्तौल, एक देसी कट्टा और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस व खोखा (कारतूस के खाली खोखे) बरामद हुए।
अपराधियों की पहचान:
जेपी यादव (निवासी: खरौजा रोड, दानापुर) – मुख्य साजिशकर्ता
सूरज कुमार उर्फ राजा शर्मा (निवासी: गंगहरा, शाहपुर) – मुख्य शूटर
बब्लू कुमार उर्फ सूरज कुमार (निवासी: सुअरमरवा, मनेर) – मुख्य शूटर
पुलिस ने तीनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड से क्या है कनेक्शन?
दानापुर-2 के एसडीपीओ ए.के. झा ने इस मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि ये तीनों अपराधी व्यापुर के पैक्स अध्यक्ष संजीत कुमार उर्फ भोलू की सनसनीखेज हत्या में सीधे तौर पर शामिल थे।
बब्लू कुमार और सूरज कुमार ने इस हत्याकांड में मुख्य शूटर की भूमिका निभाई थी।
जेपी यादव इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड यानी मुख्य साजिशकर्ता था।
गौर करने वाली बात यह है कि उसी घटना में मनेर प्रखंड प्रमुख के पति पिंटू पॉइजन भी अपराधियों की गोली से जख्मी हुए थे, हालांकि वे बाल-बाल बच गए थे।
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ऑपरेशन का विवरण
पुलिस को पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि पैक्स अध्यक्ष हत्याकांड के सभी नामजद अपराधी शेरपुर के दियारा इलाके में छिपे हुए हैं। इसी सूचना के आधार पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस ने तड़के पूरे इलाके की घेराबंदी की।
खुद को घिरता देख अपराधियों ने पुलिस बल पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षार्थ (Self-defense) जवाबी कार्रवाई की, जिसमें तीनों अपराधी मारे गए। ये तीनों अपराधी मनेर समेत पटना के कई अन्य थानों में भी कई मामलों में वांटेड थे और लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे थे।
