पुनपुन के जहर से मर रहा है फतुहा का ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम, वारुणी मेले के अस्तित्व पर संकट
फतुहा, पटना: पटना से 20 किलोमीटर दूर फतुहा शहर के किनारे स्थित ऐतिहासिक त्रिवेणी संगम आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। यहाँ गंगा, पुनपुन और गंडक नदियों का मिलन होता है और इसी संगम तट पर भगवान वामन का सैकड़ों साल पुराना पौराणिक मंदिर स्थित है।
हर साल वामन द्वादशी पर यहाँ तीन दिवसीय भव्य वारुणी मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु गंगा स्नान और वामन देव की पूजा के लिए आते हैं। वर्षों से यह परंपरा रही है कि लोग स्नान, पूजा अर्चना के बाद मेले से घरेलू सामान की खरीदारी करते हैं। लेकिन अब यह परंपरा टूटने लगी है।
फतुहा: नमामि गंगे’ के दावों पर राजद का तीखा प्रहार, प्रधानमंत्री के बहाने 50 करोड़ का ‘फ्रॉड’
वजह है – पुनपुन नदी का जहरीला पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कई वर्षों से त्रिवेणी संगम में मिलने वाली पुनपुन नदी पूरी तरह से दूषित हो चुकी है। इस कारण संगम पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। अब लोग सिर्फ मंदिर में पूजा-अर्चना करके लौट जाते हैं, संगम में डुबकी लगाने से कतराते हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि स्नान के दौरान कहीं भी गंगा की निर्मलता नहीं दिखती, और स्नान के बाद शरीर से अजीब सी दुर्गंध आती है।
नाले का पानी सीधे पुनपुन में
इस मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल के फतुहा शहर अध्यक्ष डॉ. दयानंद प्रसाद यादव ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
न्यूज़लहर से विशेष बातचीत के दौरान उन्होंने आरोप लगाया है कि
“सरकार नमामि गंगे के नाम पर करोड़ों रुपये शुद्धिकरण के नाम पर खर्च करने का ढोंग करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। पटना शहर के सभी नालों का गंदा और बदबूदार पानी पटना के”पहाड़ी पर” बने कथित शुद्धिकरण केंद्र से सीधे पुनपुन नदी में छोड़ दिया जाता है। इस प्लांट पर करोड़ों खर्च हुए हैं, पर इसकी सच्चाई पुनपुन किनारे बसे गांवों में जाकर देखी जा सकती है।”
फतुहा में गंगा कब तक मैली होते रहेगी, पुनपुन नदी इतनी जहरीली कैसे हो गई??
10 किलोमीटर तक दुर्गंध, किसान भी परेशान
पुनपुन किनारे लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में बसे ग्रामीण अब इस दुर्गंध के आदी हो चुके हैं। और अनेकों को स्वास्थ्य संबंधित शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि लोग खुद तो दूर, अपने मवेशियों को भी नदी किनारे नहलाने या पानी पिलाने नहीं ले जाते।
सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। फसल की बुआई से कटाई तक उन्हें इसी दूषित पानी से सिंचाई करनी पड़ती है, जिसके कारण यहाँ की सब्जियों और अनाज के स्वाद और गुणवत्ता में भी गिरावट महसूस की जा रही है।
पितृपक्ष मेला पुनपुन में श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
यह मांग की गई
डॉ. दयानंद यादव ने एक संयुक्त मांग पत्र द्वारा केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि पटना के नालों के गंदे पानी को फतुहा की ओर न बहाकर धोबा नदी की ओर मोड़ा जाए। इससे त्रिवेणी संगम की पवित्रता भी बची रहेगी और किसान भी इस पानी का कृषि कार्य में सुरक्षित उपयोग कर सकेंगे।
इस मांग पत्र पर धर्मवीर यादव, मनोज यदुवंशी, रामप्रसाद यादव, भोला सिंह, दीना प्रसाद, उपेंद्र कुमार, दिलीप कुमार, अल्पेन्दु कुमार, सविता देवी सहित दर्जनों लोगों ने हस्ताक्षर कर समर्थन दिया है।
