Sunday, June 14, 2026
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नमामि गंगे’ के दावों पर राजद का तीखा प्रहार, प्रधानमंत्री के बहाने 50 करोड़ के ‘फ्रॉड’

नमामि गंगे’ के दावों पर राजद का तीखा प्रहार, प्रधानमंत्री के बहाने 50 करोड़ के ‘फ्रॉड’

फतुहा (पटना)। बिहार में नदियों की निर्मलता और स्वच्छता के दावे एक बार फिर प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ते दिखाई दे रहे हैं। पटना जिले के फतुहा में त्रिवेणी संगम (गंगा और पुनपुन नदी का मिलन स्थल) को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से करोड़ों की लागत से तैयार हुआ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आज खुद बदहाली का शिकार है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार और प्रशासनिक अमले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

​राजद के फतुहा शहर प्रमुख दयानंद प्रसाद सिंह ने सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए इसे फतुहा की जनता के साथ एक बड़ा ‘वित्तीय और प्रशासनिक छलावा’ करार दिया है।

प्रोजेक्ट का धरातल: उद्घाटन भव्य, हकीकत शून्य

​उल्लेखनीय है कि 20 जून 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से फतुहा प्रखंड के गढ़ोचक गांव में निर्मित 7 एमएलडी क्षमता वाले इस सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का उद्घाटन किया था। नमामि गंगे योजना के अंतर्गत 49.21 करोड़ रुपये (लगभग 50 करोड़) की भारी-भरकम लागत से इस परियोजना को तैयार किया गया था। यह बिहार की उन छह बड़ी सीवरेज परियोजनाओं का हिस्सा था, जिसकी कुल लागत 1,800 करोड़ रुपये से अधिक है।

कागजों पर तय किए गए मुख्य उद्देश्य:

​फतुहा नगर क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को रिफाइन (उपचारित) करना, ताकि उसे नदियों में मिलने से रोका जा सके।

​त्रिवेणी संगम पर प्रदूषण को नियंत्रित कर जल को आचमन और स्नान के योग्य बनाए रखना।

​भविष्य की आबादी को ध्यान में रखते हुए शहरी सीवेज प्रबंधन का सुदृढ़ीकरण करना।

​स्थानीय स्तर पर जनस्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण का संरक्षण करना।

ग्राउंड रिपोर्ट: “संयंत्र पड़ा-पड़ा सड़ रहा, बिना काम के बंट रहा वेतन”

​समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो यह प्रोजेक्ट आज पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है। उद्घाटन के महीनों बाद भी यह रिफाइनरी संयंत्र आज तक सुचारू रूप से चालू नहीं हो सका है।

प्रदूषित होती त्रिवेणी: पटना नगर निगम और फतुहा नगर परिषद के नालों का गंदा व जहरीला पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे पुनपुन नदी के रास्ते गंगा में प्रवाहित हो रहा है। जिस गंगा जल को कभी ‘अमृत’ माना जाता था, वह आज आचमन तो दूर, नहाने और कपड़े धोने लायक भी नहीं बचा है।

अधिकारियों की लापरवाही: 50 करोड़ की यह सरकारी संपत्ति बिना उपयोग के सड़ रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस बंद पड़े प्लांट के लिए जिन कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, वे बिना कोई काम किए हर महीने सरकारी खजाने से वेतन उठा रहे हैं। यह सीधे तौर पर जनता के टैक्स के पैसे की सरेआम बर्बादी है।

​राजद ने प्रधानमंत्री के बहाने ‘फ्रॉड’ का लगाया आरोप

​इस प्रशासनिक विफलता को लेकर राजद के फतुहा शहर प्रमुख दयानंद प्रसाद सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि:

​”देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और चेहरे का इस्तेमाल कर फतुहा वासियों के साथ 50 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया गया है। दिखावे के लिए उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन जमीन पर गंगा शुद्धिकरण महज एक छलावा साबित हुआ। इस पूरी धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जो भी अधिकारी या एजेंसियां जिम्मेदार हैं, उन पर तुरंत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”

​आंदोलन की चेतावनी

​फतुहा की जनता और मुख्य विपक्षी दल राजद की मांग बेहद स्पष्ट है—जब तक पुनपुन और गंगा में गिरने वाले पानी को पूरी तरह स्वच्छ करने की कोई वैकल्पिक और ठोस व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक यह आक्रोश थपने वाला नहीं है। राजद ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस 50 करोड़ी प्लांट को चालू कर नदियों को प्रदूषित होने से नहीं रोका गया, तो पार्टी सड़क पर उतरकर एक उग्र जन-आंदोलन की शुरुआत करेगी।

​यह मामला सिर्फ एक सरकारी प्रोजेक्ट के बंद होने का नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर प्रशासनिक अपराध है, जिस पर तुरंत जवाबदेही तय होनी जरूरी है।

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