पटना, 16 सितंबर 2026: बिहार में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई को सशक्त बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार) के निर्देशों के तहत यह विशेष अभियान 9 सितंबर से 8 अक्टूबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इस वर्ष इस अभियान की थीम “हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेवारी” रखी गई है।

बिहार के ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत जीविका की दीदियाँ इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप देते हुए इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
अभियान के मुख्य बिंदु और त्रि-स्तरीय रणनीति
राष्ट्रीय पोषण माह के तहत स्वास्थ्य, स्वच्छता और बेहतर पोषण संदेशों को धरातल पर उतारने के लिए जीविका द्वारा तीन स्तरों पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है:
स्वयं सहायता समूह (SHG) स्तर पर:
प्रदेश के 11.88 लाख स्वयं सहायता समूहों की साप्ताहिक बैठकों में पोषण पर चर्चा अनिवार्य की गई है।
संतुलित आहार, स्थानीय मोटे अनाज (श्री अन्न) के उपयोग, एनीमिया से बचाव, स्तनपान के महत्त्व, और 7 से 23 माह के बच्चों के पूरक आहार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दीदियों को अपने घरों में पोषण वाटिका (किचन गार्डन) लगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
ग्राम संगठन स्तर पर:
73 हजार से अधिक ग्राम संगठनों द्वारा पोषण रैलियाँ, प्रभात फेरियाँ, और आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ समन्वय बैठकें की जा रही हैं।
किशोरियों के लिए माहवारी स्वच्छता और एनीमिया जाँच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

गर्भवती एवं धात्री (स्तनपान कराने वाली) महिलाओं की गोदभराई और बच्चों के अन्नप्राशन कार्यक्रमों को पोषण जागरूकता से जोड़ा जा रहा है।
संकुल स्तरीय संघ (CLF) स्तर पर:
1684 संकुल स्तरीय संघों द्वारा प्रखंड और जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग एवं समेकित बाल विकास परियोजना (ICDS) के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर पोषण प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।
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सकारात्मक बदलाव और जमीनी प्रभाव
पिछले आठ वर्षों से आयोजित हो रहे पोषण माह अभियानों के कारण ग्रामीण बिहार में व्यापक सामाजिक और स्वास्थ्य परिवर्तन देखे गए हैं:
संस्थागत एवं सुरक्षित प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
शिशु मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है।
महिलाओं और परिवारों में स्वास्थ्य एवं पोषण के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
मास्टर रिसोर्स पर्सन और जीविका मित्रों की सक्रिय भूमिका
इस अभियान की सफलता के पीछे जीविका कैडर की अहम भूमिका है:
मास्टर रिसोर्स पर्सन (MRP): समुदाय को पोषण से संबंधित विषयों पर प्रशिक्षित कर रहे हैं।
सामुदायिक पोषण संसाधन सेवी (CNRP): घर-घर पहुँचकर लक्षित परिवारों को पोषण व्यवहार समझा रही हैं।
जीविका मित्र: महिलाओं को बच्चों की वृद्धि निगरानी, समय पर टीकाकरण और अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अभियान की प्रगति का जिला परियोजना प्रबंधकों (DPM) द्वारा प्रतिदिन जिला, प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर अनुश्रवण (Monitoring) किया जा रहा है।
जीविका दीदियों की यह सक्रियता कुपोषण मुक्त बिहार के निर्माण में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
