Thursday, September 17, 2026
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केप टाउन में गूंजा भारत और बिहार का स्वर, 69वें CPA सम्मेलन में डॉ. प्रेम कुमार ने उठाई जलवायु न्याय की पुरजोर मांग

दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में चल रहे 69वें कॉमनवेल्थ संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन में बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण बेहद प्रभावशाली ढंग से रखा।जलवायु अनुकूलन और लचीलापन बढ़ाने में संसदीय नेतृत्व की भूमिका’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व से जुड़ा साझा संकट बन चुका है।

केप टाउन, 16 सितंबर: दक्षिण अफ्रीका के केप टाउन में चल रहे 69वें कॉमनवेल्थ संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन में बिहार विधान सभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने वैश्विक मंच पर भारत का दृष्टिकोण बेहद प्रभावशाली ढंग से रखा।

‘जलवायु अनुकूलन और लचीलापन बढ़ाने में संसदीय नेतृत्व की भूमिका’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व से जुड़ा साझा संकट बन चुका है।

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3.6 अरब लोग प्रभावित, अब सिर्फ राहत से काम नहीं चलेगा

डॉ. कुमार ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी – करीब 3.6 अरब लोग – भीषण सूखा, बाढ़, चक्रवात, बढ़ते तापमान और जल-खाद्य असुरक्षा से जूझ रही है।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब आपदा के बाद सिर्फ राहत-बचाव तक सीमित न रहकर भविष्य के जोखिमों का पूर्व आकलन, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना और प्रकृति-संगत, आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाए। जलवायु अनुकूलन को विकास की प्राथमिकता में शामिल करना ही होगा।

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भारत का मॉडल : विकास भी, पर्यावरण भी

डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश के सामने दोहरी चुनौती है – तेज आर्थिक विकास भी करना है और जलवायु के दुष्प्रभावों से भी निपटना है। भारत की सभ्यतागत दृष्टि हमेशा से प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व और संतुलन पर टिकी रही है।

उन्होंने बताया कि भारत ने 2023 में पेरिस समझौते के तहत अपना पहला ‘एडप्टेशन कम्युनिकेशन’ पेश कर स्पष्ट कर दिया था कि जलवायु अनुकूलन हमारे विकास मॉडल का अभिन्न हिस्सा है।

ऐतिहासिक रूप से कम उत्सर्जन करने वाले विकासशील देशों पर जलवायु संकट का असमान बोझ पड़ रहा है, इसलिए ‘जलवायु न्याय’ (Climate Justice) आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

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भारत की उपलब्धियां गिनाईं – 52% से ज्यादा गैर-जीवाश्म ऊर्जा

अपने संबोधन में डॉ. कुमार ने भारत की प्रमुख पहलों का उल्लेख किया – राष्ट्रीय जलवायु कार्य योजना, इंटरनेशनल सोलर एलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI), नमामि गंगे, मिष्टी योजना, आर्द्रभूमि संरक्षण, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम और जन-भागीदारी से जुड़ा मिशन लाइफ (LiFE)।

उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 तक भारत की कुल ऊर्जा क्षमता 520.51 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें गैर-जीवाश्म स्रोतों की हिस्सेदारी 52.57 प्रतिशत है।

बिहार की ऐतिहासिक पहल का भी किया जिक्र
इस वैश्विक मंच पर डॉ. कुमार ने बिहार विधान सभा की उस ऐतिहासिक पहल का विशेष उल्लेख किया, जब मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों की मौजूदगी में सभी विधायकों ने लगातार 8 घंटे तक जलवायु और पर्यावरण पर गंभीर मंथन किया था। इसी मंथन से ‘जल-जीवन-हरियाली’ जैसी दूरदर्शी योजना को आकार मिला।

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5 सूत्रीय मंत्र दिया – क्लाइमेट पार्लियामेंट्री नेटवर्क का प्रस्ताव

अंत में डॉ. कुमार ने वैश्विक जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए संसदों की भूमिका पर 5 प्रमुख प्राथमिकताएं रखीं:

1. विधायी और बजटीय प्रक्रियाओं में जलवायु अनुकूलन को उचित स्थान देना

2. वैज्ञानिक आकलनों को नीति-निर्माण का आधार बनाना

3. जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण को सुगम बनाना

4. राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के बीच साझा ‘क्लाइमेट पार्लियामेंट्री कोऑपरेशन नेटवर्क’ बनाना

5. स्थानीय समुदायों और महिलाओं को जलवायु कार्रवाई में सक्रिय भागीदार बनाना

अभियंताओं की भूमिका विकास के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण: राज्यपाल

उन्होंने कहा, “एक सुरक्षित, स्वस्थ और संवहनीय भविष्य सिर्फ सशक्त सरकारों से नहीं, बल्कि सशक्त लोकतांत्रिक संस्थाओं के सहयोग से ही संभव है। आज जरूरत है क्लाइमेट एक्शन, क्लाइमेट जस्टिस, क्लाइमेट फाइनेंस और क्लाइमेट कोऑपरेशन के समन्वित क्रियान्वयन की।”

इस सत्र में जमैका, केन्या, युगांडा, पाकिस्तान सहित कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। जमैका की संसद की अध्यक्ष श्रीमती जूलियट होलनेस ने डॉ. प्रेम कुमार का स्वागत किया, वहीं डॉ. कुमार ने उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

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