पटना, 22 जून 2026: बिहार में सरकारी जमीनों की सुरक्षा और भूमि अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के प्रत्येक आवेदन के निष्पादन से पहले संबंधित भूमि का सरकारी भूमि अभिलेखों से अनिवार्य रूप से मिलान किया जाएगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी जमीन पर गलत तरीके से जमाबंदी कायम होने की संभावना को पूरी तरह समाप्त करना है।
राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कई मामलों में यह पाया गया है कि दाखिल-खारिज प्रक्रिया के दौरान सरकारी भूमि से जुड़े अभिलेखों का समुचित सत्यापन नहीं होने के कारण भविष्य में विवाद उत्पन्न होते हैं और सरकारी जमीन पर गलत जमाबंदी होने की आशंका बनी रहती है।
सभी अंचल अधिकारियों को सख्त निर्देश
विभाग द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के अंचल अधिकारियों को स्पष्ट रूप से निर्देशित करें कि किसी भी दाखिल-खारिज आवेदन को स्वीकृत करने से पहले सरकारी भूमि की उपलब्ध सूची से उसका मिलान अनिवार्य रूप से किया जाए। जांच और सत्यापन के बाद ही आवेदन का निष्पादन किया जाएगा।
बिहारभूमि पोर्टल से होगी ऑनलाइन जांच
मंत्री ने बताया कि बिहारभूमि पोर्टल के ई-जमाबंदी मॉड्यूल में सरकारी भूमि के डिजिटलीकरण, प्रविष्टि और सत्यापन के लिए आवश्यक तकनीकी प्रावधान पहले से उपलब्ध हैं। खतियान और सरकारी भूमि पंजी के आधार पर चिन्हित सरकारी जमीनों से संबंधित जमाबंदियों की सूची अंचल अधिकारियों के लॉगिन में उपलब्ध करा दी गई है। इससे दाखिल-खारिज से पहले भूमि का ऑनलाइन सत्यापन और मिलान करना आसान हो गया है।
विभागीय समीक्षा में सामने आई थी कमी
राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि कुछ स्थानों पर दाखिल-खारिज मामलों में सरकारी भूमि अभिलेखों का नियमित मिलान नहीं किया जा रहा था। विभाग ने इसे गंभीरता से लेते हुए अब पूरे राज्य में एक समान और सख्त व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
डॉ. जायसवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करना विभाग की प्राथमिकता है। बिहारभूमि पोर्टल के माध्यम से भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और ऑनलाइन सत्यापन की व्यवस्था न केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, बल्कि आम नागरिकों के हितों की भी रक्षा करेगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की मंशा है कि सरकारी भूमि का एक-एक इंच सुरक्षित रहे तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता, फर्जीवाड़े या त्रुटिपूर्ण जमाबंदी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो। इसके लिए विभाग तकनीकी सुधारों, निगरानी तंत्र और जवाबदेही की व्यवस्था को लगातार मजबूत कर रहा है।
प्रमुख बातें
दाखिल-खारिज से पहले सरकारी भूमि सूची से अनिवार्य मिलान होगा।
सभी जिलाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को निर्देश जारी।
बिहारभूमि पोर्टल के ई-जमाबंदी मॉड्यूल का होगा उपयोग।
सरकारी जमीन पर गलत जमाबंदी की संभावना होगी समाप्त। भूमि प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
