Thursday, April 23, 2026
Homeराजनीतिबिहार की नई सरकार का अद्भुत फरमान: ‘पाषाण युग’ में चलो सब...

बिहार की नई सरकार का अद्भुत फरमान: ‘पाषाण युग’ में चलो सब — प्रियंका भारती

पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों विकास की परिभाषा थोड़ी ‘धुंधली’ और ‘धुएं वाली’ हो गई है। राज्य सरकार ने गैस की किल्लत का जो समाधान निकाला है, उसे देखकर आधुनिकता भी अपना सिर पकड़ कर बैठ गई है। सरकार के ताजा फरमान के अनुसार, अब राशन कार्ड धारकों को गैस सिलेंडर के बजाय 90 किलो कोयला बांटा जाएगा।

इस ‘ऐतिहासिक’ फैसले पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने जोरदार तंज कसा है। उन्होंने इसे विकास नहीं, बल्कि सभ्यता का ‘रिवर्स गियर’ करार दिया है।

“धुएं से होगा डिजिटल बिहार का श्रृंगार”
प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले तो उन्हें लगा कि यह किसी शरारती तत्व की फैलाई हुई ‘फेक न्यूज़’ है, लेकिन जब सरकारी मुहर देखी तो हकीकत समझ आई। उन्होंने सरकार पर प्रहार करते हुए कहा:

“महामानव और उनके शागिर्द देश को उल्टी दिशा में ले जा रहे हैं। अब बस पत्थर 🪨 रगड़कर आग जलाने वाले युग में प्रवेश करना ही बाकी रह गया है!”

फरमान के पीछे का ‘गुप्त’ विज्ञान?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार शायद जनता को आत्मनिर्भर बनाने की अगली किश्त दे रही है। इस फरमान के कुछ ‘अद्भुत’ पहलू यहाँ देखे जा सकते हैं:

जिम जाने की छुट्टी: 90 किलो कोयला उठाना और उसे फोड़ना अपने आप में एक कसरत है। सरकार चाहती है कि बिहार का हर नागरिक बिना किसी जिम मेंबरशिप के ‘बाहुबली’ बन जाए।

मेक इन इंडिया: ओल्ड एडिशन: उज्ज्वला योजना के खाली सिलेंडरों को अब गमले या बैठने वाले स्टूल के रूप में इस्तेमाल करने का सुनहरा अवसर मिल गया है।

पर्यावरण का ‘अनोखा’ संतुलन: जहाँ दुनिया नेट-जीरो और क्लीन एनर्जी की रट लगाए बैठी है, वहीं बिहार सरकार ने ‘कोयला क्रांति’ लाकर यह बता दिया है कि पुराने रास्ते ही असली रास्ते हैं।

जनता की रसोई, अब कोयले के भरोसे
सरकार के इस फैसले के बाद अब राशन की दुकानों पर बोरियों में भरकर कोयला पहुँचाने की तैयारी है। विपक्ष का कहना है कि जो सरकार जनता को रसोई गैस उपलब्ध नहीं करा पा रही, वह अब उन्हें धुएं और कालिख के बीच धकेल रही है।

अब देखना यह होगा कि क्या बिहार की जनता इस ‘कोयला-युग’ को स्वीकार करती है, या फिर आने वाले चुनाव में इस ‘धुएं’ का हिसाब-किताब चुकता करती है। प्रियंका भारती के शब्दों में कहें तो, “हम पाषाण युग की ओर कदम बढ़ा चुके हैं, बस गुफाओं में शिफ्ट होना बाकी है।”

यह भी पढ़े

अन्य खबरे