Friday, September 11, 2026
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गंगा किनारे अतिक्रमण पर प्रशासन का ‘बुलडोजर’ प्रहार: पटना में लगातार दूसरे दिन हटाए गए अवैध निर्माण

पटना। पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एसएम के कड़े रुख के बाद गंगा नदी के किनारे अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को लगातार दूसरे दिन विशेष अतिक्रमण उन्मूलन अभियान चलाकर गंगा किनारे की असर्वेक्षित सरकारी भूमि से कई पक्के और कच्चे निर्माण ध्वस्त किए गए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि गंगा नदी के फ्लड प्लेन एरिया और सरकारी भूमि पर किसी भी व्यक्ति का निजी दावा मान्य नहीं होगा और अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​जिला प्रशासन की टीम ने आज पटना सिटी और पटना सदर अनुमंडल के विभिन्न क्षेत्रों में सघन छापेमारी और तोड़फोड़ की कार्रवाई की:

पटना सिटी (भद्र घाट से कंगन घाट): यहाँ से 17 अस्थायी संरचनाएं हटाई गईं, जिनमें 9 झोपड़ियां और 8 स्टॉल शामिल थे। प्रशासन ने यहाँ से 2 टीपर बालू भी जब्त किया और अतिक्रमणकारियों से 10,000 रुपये का जुर्माना वसूला।

पाटलिपुत्र अंचल (दीघा मुख्य सड़क): सुरक्षा बांध के गेट नंबर 79 से 83 तक चले अभियान में 35 अवैध पक्के निर्माणों को जमींदोज कर दिया गया।

जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा का तटीय क्षेत्र नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और माननीय उच्चतम न्यायालय के कड़े आदेशों के दायरे में आता है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की निजी संरचना का निर्माण प्रतिबंधित है। असामाजिक तत्वों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए किए जा रहे इन निर्माणों पर अब जिला प्रशासन की पैनी नजर है।

​अतिक्रमण हटाने का उद्देश्य केवल भूमि खाली कराना नहीं, बल्कि शहर का विकास है। जिलाधिकारी के अनुसार:

विकास योजनाएं: खाली कराई गई जमीन पर वन विभाग, नगर विकास और पथ निर्माण विभाग द्वारा सौन्दर्यीकरण का कार्य किया जाएगा।

यातायात सुगमीकरण: जेपी गंगा पथ, अशोक राजपथ और पटना साहिब जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर ट्रैफिक जाम की समस्या खत्म करने के लिए पार्किंग और यू-टर्न विकसित किए जाएंगे।

पर्यटन को बढ़ावा: पटना साहिब के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया जा रहा है।

प्रशासन ने आदतन अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध विधि-सम्मत दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी ने अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) और पुलिस अधिकारियों को सुनिश्चित करने को कहा है कि हटाए गए स्थानों पर दोबारा अतिक्रमण न हो। इसके लिए एक ‘डेडिकेटेड शहरी प्रबंधन इकाई’ भी सक्रिय रूप से काम कर रही है।

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