खगड़िया। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को खगड़िया में मजदूर और किसान संगठनों ने ‘काला दिवस’ मनाते हुए जोरदार प्रतिरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन चार श्रम संहिताओं, प्रस्तावित बीज बिल-2025, बिजली संशोधन विधेयक और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसी नीतियों के खिलाफ आयोजित किया गया।
प्रतिरोध मार्च का आयोजन एटक (AITUC), खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा और एफ-टू-न्यू के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। प्रदर्शनकारी सीपीआई जिला कार्यालय (योगेंद्र भवन) से लामबंद होकर निकले और शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए बलुआही एनएच-31 तक पहुंचे, जहां एक विशाल सभा का आयोजन किया गया।
प्रमुख मांगें और विरोध के बिंदु
सभा की अध्यक्षता बिहार राज्य किसान सभा के राज्य उपाध्यक्ष प्रभाशंकर सिंह ने की। मुख्य वक्ताओं ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए निम्नलिखित मांगें रखीं:
- श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध: खेत मजदूर यूनियन के उप महासचिव पुनीत मुखिया ने कहा कि मजदूरों ने लंबे संघर्ष से जो अधिकार पाए थे, उन्हें चार श्रम संहिताओं के जरिए खत्म कर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
- कृषि विरोधी नीतियां: वक्ताओं ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और प्रस्तावित बीज बिल-2025 को किसानों की आजीविका पर हमला बताया और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की।

- मनरेगा और बिजली बिल: मनरेगा को कमजोर करने वाले प्रावधानों और बिजली संशोधन अधिनियम को रद्द करने की आवाज उठाई गई।
- आंगनबाड़ी कर्मियों का हक: एटक की जिला महासचिव निर्मला कुमारी ने आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने तथा उचित न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग की।

इन नेताओं ने किया नेतृत्व
इस मार्च में पुनीत मुखिया, प्रभाशंकर सिंह, चंद्रजीत कुमार, निर्मला कुमारी, रमेश चंद्र चौधरी, बंदना कुमारी, पूजा कुमारी और सुनील कुमार सहित कई दिग्गज नेताओं ने नेतृत्व किया। प्रदर्शन में खगड़िया जिला आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की सेविकाओं और भारी संख्या में किसान-मजदूरों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
सभा को मीनाक्षी कुमारी, रीता कुमारी, विभाष चंद्र बोस और चंद्रकिशोर यादव सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित कर आंदोलन को और तेज करने का संकल्प लिया।
