Monday, March 30, 2026
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चुनावी खैरात की अब जी भरकर होगी वसूली”: तेजस्वी यादव का नीतीश-भाजपा सरकार पर तीखा हमला

पटना, 30 मार्च 2026
​बिहार में बिजली की दरों में बदलाव और राजनीतिक घटनाक्रमों को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की एनडीए (NDA) सरकार पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। अपने सोशल मीडिया हैंडल से जारी एक बयान में तेजस्वी ने सरकार पर ‘लूट’ और ‘लोकतांत्रिक षड्यंत्र’ के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय मुफ्त बिजली का वादा करने वाली सरकार अब जनता की जेब पर डाका डाल रही है।

​”चीटर मीटर” और बिजली की नई दरें
​तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव के वक्त ‘125 यूनिट मुफ्त बिजली’ का झांसा देने वाले अपने असली रंग में लौट आए हैं। उन्होंने बिजली बिल की नई स्लैब को लेकर सरकार को घेरा:

​शाम के 6 घंटे: सर्वाधिक खपत वाले समय में ₹8.10 प्रति यूनिट की दर।

​रात के 10 घंटे: (11 बजे से सुबह 9 बजे तक) ₹7.10 प्रति यूनिट।

​शेष 8 घंटे: ₹5.94 प्रति यूनिट की वसूली।

​तेजस्वी ने कहा, “10 हजारिया के फेर में फौरी तौर पर खुश होकर वोट गिरवी रखने वालों को यह सरकार अभी इससे भी बुरे दिन दिखाएगी।”

​”41,000 करोड़ की वसूली का खेल”
​नेता प्रतिपक्ष ने चुनावी शुचिता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव के आखिरी 35 दिनों में सरकारी खजाने से 41,000 करोड़ रुपये नकद बांटे गए। उन्होंने इसे ‘भ्रष्ट अधिकारियों और भ्रष्ट भूंजा पार्टी’ का कार्टेल करार दिया। तेजस्वी के अनुसार, अब आगामी पांच सालों तक जनता से इसी रकम की ‘जी भरकर वसूली’ की जाएगी क्योंकि सरकारी खजाना खाली हो चुका है।

​”थके हुए चेहरे को बनाया मोहरा”
​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे और राज्यसभा जाने की खबरों के बीच तेजस्वी ने इसे एक ‘सोची-समझी साजिश’ बताया। उन्होंने कहा कि एक ‘थके-हारे और अचेत चेहरे’ को मोहरा बनाकर इस्तेमाल किया गया और अब इकरारनामे के तहत उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। तेजस्वी ने चेतावनी दी कि बिहार में अब रिश्वतखोरी, लूट और भ्रष्टाचार का ऐसा दौर शुरू होगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

​तेजस्वी यादव के मुख्य आरोप:
​वादाखिलाफी: मुफ्त बिजली के नाम पर जनता को गुमराह कर चुनाव जीतना और महज चार महीने बाद पलटी और महंगी दरों का बोझ लादना।

​आर्थिक संकट: चुनाव जीतने के लिए खजाना खाली करना और अब पलटी। उसकी भरपाई जनता से करना।

​लोकतांत्रिक कलंक: संवैधानिक संस्थाओं और मशीनी तंत्र का दुरुपयोग कर जनतंत्र को खत्म करने की कोशिश।

​प्रशासनिक मिलीभगत: भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य में अनियंत्रित भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना।

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